साल था 2023 और तारीख 10 मई की। कर्नाटक में कांग्रेस ने भाजपा को हराकर सत्ता पर कब्जा जमाया। कांग्रेस की इस जीत का सेहरा बंध रहा था कर्नाटक कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष डीके शिवकुमार के सिर पर, जिन्होंने लगातार भाजपा सरकार को न सिर्फ घेरा, बल्कि राज्य में अलग-अलग धड़ों में बंट चुकी कांग्रेस को भी चुनाव के लिए एकजुट कर के शक्ति प्रदर्शन किया। इतना ही नहीं शिवकुमार खुद भी आठवीं बार कनकपुरा विधानसभा सीट से चुनाव जीते। इसके बावजूद जब 17 मई को मुख्यमंत्री के चेहरे का एलान हुआ तो डीके शिवकुमार, जिन्हें राजनीतिक गलियारों में डीकेएस भी कहा जाता है, को निराशा हाथ लगी। तमाम मेहनत के बावजूद कांग्रेस आलाकमान ने उनकी मेहनत के ऊपर सरकार चलाने के अनुभव वाले सिद्धारमैया को कर्नाटक का मुख्यमंत्री बनाया। भले ही डीके शिवकुमार को डिप्टी सीएम का पद सौंप दिया गया, लेकिन सीएम पद न मिलना उनके साथ उनके समर्थकों को भी लगातार परेशान करता रहा। हालांकि, अब तीन साल बाद डीके शिवकुमार को वही पद मिलने जा रहा है, जिसके लिए लगातार तीन साल तक गुप्त समझौते से लेकर ‘हक’ तक की बात उठती रही।
ऐसे में यह जानना अहम है कि आखिर डीके शिवकुमार कौन हैं? उनका शुरुआती जीवन कैसा रहा है? कैसे कभी राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) की शाखाओं में शामिल होने वाला एक व्यक्ति कांग्रेस का कद्दावर नेता बनता चला गया? उनका राजनीतिक करियर कैसा रहा है? उनसे जुड़ी खास बातें क्या हैं? आइये …







