परीक्षा पे चर्चा का 9वां संस्करण आज सुबह 10 बजे से शुरू हो चुका है। इस खास कार्यक्रम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी देशभर के छात्रों, शिक्षकों और अभिभावकों से सीधे संवाद कर रहे हैं। कार्यक्रम का उद्देश्य छात्रों को परीक्षा से जुड़े तनाव को कम करने, उनका आत्मविश्वास बढ़ाने और करियर से जुड़े सवालों के जवाब देने में मदद करना है।
इस बार परीक्षा पे चर्चा नए अंदाज में आयोजित की जा रही है, जिसमें देशभर के छात्रों को जोड़ने और उनके सवालों के सीधे जवाब देने पर खास जोर दिया जा रहा है।
परीक्षाएं मुश्किल क्यों लगने लगती हैं?
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि कई छात्र और शिक्षक वर्षों से एक ही तरीके का पालन करते आ रहे हैं। पहले श्योर सवाल, फिर जरूरी प्रश्न और फिर पिछले 10 वर्षों के पैटर्न से ही तैयारी की जाती है। उन्होंने मजाकिया अंदाज में कहा कि यह “बीमारी” उनके समय में भी थी।
उन्होंने कहा कि कुछ शिक्षक भी इस सोच को बढ़ावा देते हैं, क्योंकि वे चाहते हैं कि उनकी क्लास या स्कूल का रिजल्ट अच्छा आए। इसलिए वे केवल वही पढ़ाते हैं जिससे नंबर मिल सकें। लेकिन एक अच्छा शिक्षक बच्चों के सर्वांगीण विकास पर ध्यान देता है, पूरा सिलेबस पढ़ाता है, उस पर मेहनत करवाता है और यह भी समझाता है कि पढ़ाई का जीवन में क्या महत्व है।
आज की मेहनत, 2047 का मजबूत भारत
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने छात्रों से विकसित भारत को लेकर सवाल पूछे। उन्होंने पूछा कि भारत को विकसित देश बनने में कितना समय लगना चाहिए।
पीएम मोदी ने कहा कि उनका लक्ष्य साल 2047 है, क्योंकि तब भारत की आजादी के 100 साल पूरे होंगे। उन्होंने छात्रों से कहा कि उस समय वे सभी बड़े हो जाएंगे, इसलिए आज की मेहनत उनके आने वाले अच्छे भविष्य के लिए है।
प्रधानमंत्री ने छात्रों को याद दिलाया कि महात्मा गांधी और भगत सिंह जैसे देशभक्तों ने आजादी के लिए बहुत मेहनत की थी। उन्होंने कहा कि जब उन्होंने देश के लिए इतना कुछ किया, तो हम सब मिलकर विकसित भारत बनाने के लिए मेहनत क्यों नहीं कर सकते?
तकनीक पढ़ाई में मददगार: पीएम मोदी
तकनीक एक बेहतरीन शिक्षक है, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा। उन्होंने बताया कि आज के समय में छात्रों को तकनीक की मदद पहले से कहीं ज्यादा मिल रही है, जो पहले संभव नहीं थी।
पीएम मोदी ने कहा कि छात्र कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) का उपयोग पढ़ाई के नोट्स या सारांश बनाने में कर सकते हैं। साथ ही, AI से सुझाव लेकर अपनी समझ और सोच को और बेहतर बनाया जा सकता है। हालांकि उन्होंने यह भी साफ किया कि तकनीक से लक्ष्य जल्दी नहीं मिल जाता, लेकिन यह पढ़ाई में एक मजबूत सहायक जरूर बन सकती है।
विकसित भारत के सपने पर पीएम मोदी का संदेश
छात्रों से बातचीत के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि विकसित भारत बनाना हम सभी की जिम्मेदारी है। इसके लिए उन्होंने कुछ जरूरी आदतों और सोच पर जोर दिया। पीएम मोदी ने कहा कि युवाओं को अपने अंदर कौशल, आत्मविश्वास और अच्छी सेहत विकसित करनी चाहिए।
उन्होंने बताया कि देश को आगे बढ़ाने के लिए मेड इन इंडिया को अपनाना बहुत जरूरी है। साथ ही साफ-सफाई का ध्यान रखना और दूसरों को भी इसके लिए प्रेरित करना हमारी जिम्मेदारी है। प्रधानमंत्री ने समय की अहमियत बताते हुए भारतीय मानक समय को लेकर भी सोच बदलने की बात कही।
विदेशी सामान पर चर्चा करते हुए पीएम मोदी ने कहा कि हम रोजमर्रा की जिदगी में कई ऐसी चीजें इस्तेमाल करते हैं, जो बाहर के देशों में बनी होती हैं। हमें धीरे-धीरे भारतीय उत्पादों को अपनाने की आदत डालनी चाहिए। उन्होंने कहा कि जब हम खुद अपने देश की चीजों पर भरोसा दिखाएंगे, तभी दुनिया भी उन्हें सम्मान देगी।
पढ़ाने की गति छात्रों की समझ के अनुसार हो: पीएम मोदी
एक छात्र ने कहा कि कई बार वह स्कूल या शिक्षक की पढ़ाने की गति से मेल नहीं बैठा पाता। जो पाठ छूट जाता है, उसे पूरा करने की कोशिश में आगे की पढ़ाई भी छूटने लगती है। छात्र ने पूछा कि ऐसी स्थिति में क्या करना चाहिए।
इस पर प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि उनका जवाब खास तौर पर शिक्षकों के लिए है। उन्होंने कहा कि शिक्षक को हमेशा इस बात का ध्यान रखना चाहिए कि वह छात्रों की गति से सिर्फ एक कदम आगे रहें, उससे ज्यादा नहीं।
प्रधानमंत्री ने कहा कि हमारा लक्ष्य ऐसा होना चाहिए जो हमारी पहुंच में हो, लेकिन जिसे पाने के लिए हमें थोड़ा प्रयास करना पड़े। लक्ष्य इतना दूर नहीं होना चाहिए कि हम हताश हो जाएं।
कौन-सी छोटी आदत सपनों को पूरा करने में मदद करती है?
इस सवाल पर एक छात्र ने प्रधानमंत्री मोदी से मार्गदर्शन मांगा। जवाब में प्रधानमंत्री मोदी ने सबसे पहला सुझाव दिया कि महान लोगों की जीवनियां पढ़नी चाहिए। उन्होंने कहा कि इससे यह समझ आता है कि आज जो लोग बड़े और सफल हैं, वे भी कभी हमारी ही तरह सामान्य हालात में थे।
पीएम मोदी ने बताया कि जीवनियां पढ़ने से हमें सही और व्यावहारिक योजना बनाने में मदद मिलती है। साथ ही यह याद रहता है कि सफलता एक दिन में नहीं मिलती, बल्कि सीढ़ी की तरह कदम-दर-कदम आगे बढ़कर हासिल होती है। हर सफल व्यक्ति भी एक इंसान होता है, जिसने मेहनत और धैर्य से मंजिल पाई होती है।








