डिजिटल दुष्कर्म: 2 वर्षीय मासूम से डिजिटल दुष्कर्म के दोषी को 25 साल की कैद, 13.5 लाख रुपये का मुआवजा भी देना होगा

तीस हजारी कोर्ट ने दो वर्षीय बच्ची के साथ डिजिटल दुष्कर्म करने के आरोप में 30 वर्षीय व्यक्ति को 25 साल की कैद की सजा सुनाई है। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश बबीता पुनिया की अदालत ने स्पष्ट किया कि कानून में डिजिटल प्रवेश और लिंग प्रवेश के बीच कोई भेदभाव नहीं है, इसलिए इस जघन्य अपराध में कोई रियायत नहीं दी जा सकती।

घटना पिछले महीने 20 अक्तूबर को दिवाली की पूर्व संध्या पर हुई थी। दोषी पीड़िता के पिता का परिचित था। मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच और ट्रायल महज एक महीने में पूरा हो गया। 19 नवंबर को दोषी को पॉक्सो एक्ट की धारा-6 (गंभीर यौन हमला) के तहत दोषी ठहराया गया और अगले ही दिन सजा सुनाई गई।

न्यायाधीश बबीता पुनिया ने कहा कि दिवाली की पूर्व संध्या पर नशा करके एक मासूम बच्ची की जिंदगी अंधेरे में डाल देने वाला दया का हकदार नहीं हो सकता है। अदालत ने बचाव पक्ष की सभी दलीलें खारिज करते हुए कहा कि पीड़िता अपने घर में सबसे सुरक्षित जगह पर थी, लेकिन दोषी ने उस घर को ही उसके लिए डरावना बना दिया। रोशनी का त्योहार उसके और उसके परिवार के लिए जीवन भर का अंधेरा बन गया। अदालत ने दोषी को 25 साल की कैद के साथ-साथ पीड़िता को 13.5 लाख रुपये का मुआवजा का भी आदेश दिया।

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