लाल किला के पास 10 नवंबर को हुए बम धमाके की जांच के दौरान एक बड़ी जानकारी सामने आई है। जांच एजेंसियों के सूत्रों का कहना है कि जैश से जुड़े फिदायीन हमलावर डॉ. उमर ने शायद ‘शू-बम’ (जूता बम) का इस्तेमाल कर धमाके को अंजाम दिया है। बम विस्फोट में अब तक 15 लोगों की मौत हो चुकी है और करीब 20 से अधिक लोग बुरी तरह जख्मी हुए हैं।
जूते से अमोनियम नाइट्रेट और टीएटीपी के ट्रेस मिले
जूते में कोई मैकेनिज्म छिपा रखा था
शैतान की मां
नेपाल और यूपी से खरीदे गए मोबाइल फोन व 17 सिमकार्ड…
डॉ. उमर विस्फोट से एक घंटे पहले इन लोगों से था संपर्क में
जांच में पता चला है कि डॉ. उमर विस्फोट से एक घंटे पहले तक डॉ. परवेज, डॉ. मो. आरिफ और डॉ. फारूक अहमद डार के संपर्क में था। डॉ. परवेज, डॉ. शाहीन सईद का भाई है। शाहीन को फरीदाबाद स्थित अल-फलाह विश्वविद्यालय से गिरफ्तार किया गया। डॉ. परवेज लखनऊ स्थित इंटीग्रल विश्वविद्यालय में सहायक प्रोफेसर के पद पर तैनात था।
लाल किला के पास बम धमाके की जांच में जुटी एजेंसियां ‘फिदायीन हमलावर’ डॉ. उमर की धमाके से पहले की गतिविधियों का पता लगाने में जुटी हैं। जांच में पता चला कि फिदायीन उमर बम धमाके से पहले पांच सिमकार्ड का इस्तेमाल कर रहा था। सूत्रों का कहना है कि डॉ. उमर ने 30 अक्तूबर से 10 नवंबर के बीच दो फोन का इस्तेमाल किया। फिलहाल यह दोनों मोबाइल गायब हैं। बम धमाके वाले दिन उमर ने दो सिमकार्ड का इस्तेमाल किया है। जांच दल उसका पता लगाने का प्रयास कर रही है।
अभी तक की जांच में पुलिस और जांच एजेंसियों को जो सीसीटीवी फुटेज मिले हैं, वह सभी 30 अक्तूबर तक के हैं या 9 और 10 नवंबर के हैं। इस बीच 9 दिन उमर कहां था, किसके साथ था, क्या कर रहा था, इन तमाम सवालों के जवाब तलाशें जा रहे हैं। सूत्रों के मुताबिक 29, 30 अक्तूबर और 9, 10 नवंबर को फरीदाबाद से दिल्ली तक डॉ. उमर के करीब 50 सीसीटीवी कैमरों की फुटेज में देखा गया है। यह फुटेज यूनिवर्सिटी, टोल प्लाजा, दिल्ली की सड़कों व अन्य जगहों पर लगे कैमरों की हैं। कुछ ही फुटेज में वह मास्क से चेहरा छिपाए हुए दिखा है। बाकी जगह उसने चेहरा नहीं छिपाया है।









