दिल्ली: देशभर के 31 जल संरक्षकों को मिला जल प्रहरी सम्मान, विनय दास ने जीता राष्ट्रीय पुरस्कार

जल संरक्षण, तालाबों और नदियों को बचाने के लिए देशभर के 31 जल संरक्षकों को ‘जल प्रहरी सम्मान-2026’ से सम्मानित किया गया। यह सम्मान पुराने जल स्रोतों को फिर से जीवित करने के उनके प्रयासों के लिए दिया गया। सातवें जल प्रहरी सम्मान समारोह का आयोजन शुक्रवार को तीन मूर्ति स्थित विश्व युवक केंद्र में किया गया।

जल प्रहरी निर्णायक मंडल के अध्यक्ष भारत के पूर्व मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति रंजन गोगोई हैं। जल प्रहरी के संयोजक अनिल सिंह ने बताया कि सम्मान का उद्देश्य जमीन पर काम करने वालों को पहचान दिलाना है। इसका लक्ष्य उनके प्रयासों को बढ़ावा देना और लोगों को पानी बचाने के लिए जागरूक करना भी है। आयोजन समिति के सदस्य अमन वशिष्ठ ने कहा, “पानी की समस्या से निपटने के लिए समाज के हर वर्ग की भागीदारी जरूरी है।” उन्होंने बताया कि इस सम्मान से आईएएस, आईपीएस और आरएएस अधिकारियों सहित किसानों को भी सम्मानित किया गया है।

समारोह में डॉ. राजभूषण चौधरी, भाजपा सांसद अरुण सिंह, पर्यावरण गतिविधि प्रमुख गोपाल आर्य सहित कई गणमान्य लोग शामिल हुए। इस दौरान जल संरक्षण को जन आंदोलन बनाने और आने वाली पीढ़ियों के लिए पानी बचाने पर जोर दिया गया।
विनय दास ने जीता राष्ट्रीय सम्मान
जल संरक्षण, स्वच्छता और पर्यावरण के क्षेत्र में लगातार काम करने के लिए स्वस्ति दास सेवा संस्थान (एसडीएसएस) के संस्थापक विनय दास को जल प्रहरी राष्ट्रीय सम्मान 2026 से सम्मानित किया गया। विनय दास और उनकी टीम एसडीएसएस दिल्ली में मुनक नहर के आसपास जल संरक्षण, स्वच्छता और पर्यावरण के प्रति लोगों को जागरूक करने का काम कर रही है। सम्मान मिलने पर विनय दास ने कहा कि उनको जल संरक्षण और पर्यावरण की रक्षा के लिए किए जाने वाले कामों को प्रोत्साहन मिलेगा।

विभिन्न राज्यों के जल संरक्षकों को सम्मान
इस साल उत्तर प्रदेश से छह जल संरक्षकों का चयन किया गया। इनमें अजय क्रांतिकारी, अक्षय नायक, आरजे डॉ. मीनू खरे, डॉ. पवन कुमार, संदीप चौधरी और संजय कुमार शामिल हैं। राजस्थान से पांच, मध्य प्रदेश से तीन, दिल्ली व गुजरात से दो-दो जल संरक्षकों को भी सम्मानित किया गया। महाराष्ट्र, झारखंड, पंजाब और पश्चिम बंगाल से भी जल संरक्षक इस सम्मान से जुड़े।

सम्मान का मुख्य उद्देश्य
जल प्रहरी सम्मान का उद्देश्य पानी बचाने के लिए काम करने वाले लोगों को प्रोत्साहित करना है। इसका लक्ष्य समाज में जल संरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़ाना भी है। यह पहल जल स्रोतों को सुरक्षित रखने में महत्वपूर्ण है। यह ‘जल आत्मनिर्भर भारत’ के संकल्प को आगे बढ़ाती है।
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