देहरादून- मां को दिया चेक बाउंस, बेटे को छह माह की सजा, 10 लाख का अर्थदंड, पोती ने भी दादी के पक्ष में गवाही

अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट अभिषेक कुमार श्रीवास्तव की अदालत ने पहाड़ी गली निवासी कांता रानी की ओर से सम्राट होटल प्रथम तल निवासी अपने बेटे सुनील कुमार के खिलाफ दायर चेक बाउंस मामले में मंगलवार को निर्णय दिया। न्यायालय ने बेटे को दोषी करार देते हुए छह माह के साधारण कारावास ओर 1005000 के अर्थदंड की सजा सुनाई। मामले में पोती ने भी अपनी दादी के पक्ष में गवाही दी।

जुर्माना अदा करने में देरी पर आरोपी एक माह के साधारण कारावास की सजा भुगतनी होगी। जुर्माने में से पांच हजार की धनराशि राजकोष में जमा की जाएगी, शेष धनराशि का भुगतान वादी को किया जाएगा। वाद के अनुसार सुनील कुमार ने 26 अप्रैल 2019 को अपनी मां कांता रानी से एक अधिकार निर्मुक्ति विलेख पंजीकृत कराया। यह विलेख विकासनगर में एक व्यावसायिक संपत्ति की बिक्री से संबंधित था। उन्होंने संपत्ति की बिक्री से प्राप्त 50 लाख रुपये कांता रानी को देने का वादा किया था।

26 जून 2019 को संपत्ति 2,06,39,000 करोड़ रुपये में बेची। सुनील कुमार ने 17 अगस्त 2019 को 25 लाख रुपये कांता रानी के खाते में हस्तांतरित किए। शेष 25 लाख रुपये के लिए उन्होंने तीन पोस्ट-डेटेड चेक दिए थे। इनमें से 10 लाख रुपये का एक चेक 15 जनवरी 2021 को बैंक में प्रस्तुत किया गया जो बाउंस हो गया। कांता रानी ने 25 जनवरी 2021 को बेटे को कानूनी नोटिस भेजा जिसका जवाब मिला पर भुगतान नहीं हुआ।

मां के आरोप और बेटे का बचाव

कांता रानी ने न्यायालय में बताया कि 50 लाख रुपये देने का मौखिक वादा किया गया था। बेटे सुनील कुमार ने 25 लाख रुपये की देनदारी के लिए तीन चेक सुरक्षा के तौर पर दिए थे। सुनील ने अपने बचाव में कहा कि उन्होंने 25 लाख रुपये पहले ही आरटीजीएस के माध्यम से अदा कर दिए थे। आरोप लगाया कि कांता रानी ने पोस्ट-डेटेड चेक वापस नहीं किए और उनका दुरुपयोग किया।

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गवाहों के बयान और विरोधाभास

कांता रानी की पोती आंचल त्रिहान ने संपत्ति की बिक्री राशि पर अलग बयान दिया। उन्होंने यह भी कहा कि सुनील कुमार ने चेक वापस मांगने के लिए धमकी दी थी। हालांकि, आंचल ने स्वीकार किया कि संपत्ति बिक्री या धनराशि के विभाजन का कोई लिखित समझौता नहीं था। उन्होंने यह भी माना कि अधिकार निर्मुक्ति विलेख में किसी लेनदेन का उल्लेख नहीं था।

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