अमेरिका में मध्यावधि चुनाव से पहले चुनाव आयोग की वेबसाइट पर साइबर हमला हुआ है। इससे चुनावी चंदे और खर्च का ब्योरा दर्ज करने वाला इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम प्रभावित हो गया। रॉयटर्स को मिले एक ईमेल के मुताबिक, हैकर या हैकर्स ने अमेरिकी संघीय चुनाव आयोग (एफईसी) के सिस्टम में सेंध लगाने की कोशिश की। इसके बाद आयोग को अपनी ऑनलाइन सेवाएं अस्थायी रूप से बंद करनी पड़ीं।
एफईसी ने बयान में कहा, “इस समय आयोग का इलेक्ट्रॉनिक फाइलिंग सिस्टम बंद है और हमारी आईटी टीम सेवा बहाल करने के लिए सक्रिय रूप से काम कर रही है।” आयोग की वेबसाइट पर पुराने चुनावी खर्च की रिपोर्ट अब भी देखी जा सकती हैं।
मतदान पर असर नहीं, लेकिन खर्च की निगरानी मुश्किल
एफईसी अमेरिका में चुनाव कराने की जिम्मेदारी नहीं संभालता। इसलिए इस तकनीकी गड़बड़ी का मतदाताओं के वोट डालने की क्षमता पर असर पड़ने की आशंका नहीं है। हालांकि, सिस्टम बंद होने से राजनीतिक संगठनों के लिए चुनावी खर्च की 24 घंटे और 48 घंटे के भीतर जमा की जाने वाली अनिवार्य रिपोर्ट दाखिल करना मुश्किल हो गया है।
इन रिपोर्टों से पता चलता है कि राजनीतिक समूह किसी चुनाव में कितना पैसा खर्च कर रहे हैं और खर्च करने वाले संगठन कौन हैं। राजनीतिक वित्तीय नियमों का पालन कराने वाली कंपनी एमबीए कंसल्टिंग ग्रुप के अध्यक्ष और सीईओ स्टीवन मेले ने कहा, “मैंने अपने 26 साल के करियर में ऐसा कभी नहीं देखा।”
रिकॉर्ड खर्च के बीच हुआ हमला
इस बार अमेरिकी मध्यावधि चुनाव अब तक के सबसे महंगे चुनाव बन गए हैं। राजनीतिक विज्ञापन पर नजर रखने वाली संस्था एडइम्पैक्ट के मुताबिक, विज्ञापनों और भविष्य के लिए किए गए आरक्षणों पर अब तक करीब 11.21 अरब डॉलर खर्च होने का अनुमान है। यह 2024 के चुनावों में हुए 11.2 अरब डॉलर के कुल खर्च से अधिक है।
इस खर्च में सुपर पीएसी और डार्क मनी समूहों की बड़ी भूमिका है। सुपर पीएसी धनी लोगों और कंपनियों से असीमित धन जुटा सकते हैं और चुनावी अभियानों पर खर्च कर सकते हैं, जिन पर अपेक्षाकृत कम पाबंदियां हैं।
सिस्टम बंद होने का पड़ेगा क्या असर?
गैर-दलीय चुनाव निगरानी संस्था ओपनसीक्रेट्स के शोध निदेशक ब्रेंडन ग्लेविन के मुताबिक, पिछले सप्ताह सुपर पीएसी और डार्क मनी समूहों ने औसतन प्रतिदिन पांच करोड़ डॉलर से अधिक खर्च किए। उनके अनुसार, 20 अक्तूबर को ही 25 करोड़ डॉलर से ज्यादा खर्च की रिपोर्ट सामने आई थी।





