पोलैंड में सांविधानिक संकट: जजों की नियुक्ति पर विवाद, राष्ट्रपति ने छोड़ा विदेश दौरा, क्यों बढ़ा टकराव?

पोलैंड में राजनीतिक और सांविधानिक संकट गहरा गया है। प्रधानमंत्री डोनाल्ड टस्क और राष्ट्रपति कारोल नवरोकी के बीच सत्ता को लेकर टकराव बढ़ गया है। शुक्रवार रात भारी हथियारों से लैस पुलिस ने वारसॉ में सांविधानिक न्यायाधिकरण के मुख्यालय को घेर लिया। इसके बाद राष्ट्रपति नवरोकी ने सेनेगल का अपना दौरा बीच में ही छोड़ दिया। उन्होंने कहा कि ऐसे समय में राष्ट्रपति का पोलैंड में होना जरूरी है।

न्यायाधिकरण के मुख्यालय को क्यों घेरा गया?
शुक्रवार रात बड़ी संख्या में पुलिसकर्मी सांविधानिक न्यायाधिकरण के मुख्यालय के बाहर तैनात किए गए। पुलिस ने पूरे परिसर को घेर लिया। हालांकि, पुलिसकर्मी इमारत के अंदर नहीं गए। न्यायाधीश अन्ना कोर्विन-पियोत्रोव्स्का ने पुलिस तैनात करने का अनुरोध किया था। उन्होंने कहा था कि न्यायाधीशों और प्रशासनिक कर्मचारियों की सुरक्षा को खतरा हो सकता है।
इससे पहले कोर्विन-पियोत्रोव्स्का ने न्यायाधिकरण के अध्यक्ष बोगदान स्विएंत्कोव्स्की और उपाध्यक्ष बार्तलोमिएज सोखांस्की को एक महीने के लिए निलंबित कर दिया था। इसके बाद उन्होंने अस्थायी रूप से न्यायाधिकरण का कामकाज अपने हाथ में ले लिया।

पोलिश प्रेस एजेंसी (पीएपी) के मुताबिक, दोनों वरिष्ठ अधिकारियों पर अपने आधिकारिक कर्तव्यों का सही तरीके से पालन नहीं करने के आरोप हैं। उन पर कोर्विन-पियोत्रोव्स्का समेत कानूनी रूप से नियुक्त न्यायाधीशों को न्यायाधिकरण की कार्यवाही में शामिल होने से रोकने का भी आरोप है।

निलंबित अधिकारियों की आधिकारिक प्रोफाइल न्यायाधिकरण के ऑनलाइन पोर्टल से हटा दी गईं। इसके बाद न्यायाधिकरण ने सोशल मीडिया पर बयान जारी किया। इसमें कहा गया कि उसकी वेबसाइट पर ‘अवैध कब्जा’ किया गया है। बयान में कहा गया कि कोर्विन-पियोत्रोव्स्का को न्यायाधिकरण की ओर से बोलने का अधिकार नहीं है। इसमें यह भी कहा गया कि इस कार्रवाई में शामिल लोग ‘तख्तापलट का अपराध कर रहे हैं’।

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विवाद की शुरुआत कैसे हुई?

  • पोलैंड में यह टकराव 2026 की शुरुआत से चल रहा है। राष्ट्रपति नवरोकी ने संसद की ओर से चुने गए छह न्यायाधीशों में से तीन को शपथ दिलाने से इनकार कर दिया था।
  • प्रधानमंत्री टस्क की सरकार उन फैसलों को मानने से इनकार करती है, जिन्हें पिछली लॉ एंड जस्टिस (पीआईएस) सरकार के कार्यकाल में नियुक्त न्यायाधीशों ने दिया था।
  • राष्ट्रपति नवरोकी और न्यायाधिकरण के अध्यक्ष स्विएंत्कोव्स्की भी 2026 में संसद के निचले सदन सेजम की ओर से चुने गए न्यायाधीशों को मान्यता नहीं देते हैं।
  • न्यायाधीश अन्ना कोर्विन-पियोत्रोव्स्का इस विवाद के केंद्र में हैं। राष्ट्रपति ने उन्हें शपथ दिलाने से इनकार कर दिया था। वहीं, स्विएंत्कोव्स्की ने उन्हें न्यायाधिकरण की सुनवाई में शामिल होने से रोक दिया था।
  • सत्तारूढ़ सिविक प्लेटफॉर्म (पीओ) पार्टी और पूर्व सत्तारूढ़ लॉ एंड जस्टिस (पीआईएस) पार्टी के बीच राजनीतिक खींचतान के कारण न्यायाधिकरण की वैधता को लेकर कई साल से विवाद चल रहा है।

प्रधानमंत्री टस्क ने क्या कहा?
प्रधानमंत्री डोनाल्ड टस्क ने कहा, कानून का शासन बहाल करना हमारा कर्तव्य है। पीआईएस के नेतृत्व में कई साल तक कानून की अनदेखी के बाद यह एक कठिन प्रक्रिया है। कभी-कभी यह दर्दनाक भी होती है और इसके लिए निर्णायक कार्रवाई की जरूरत है। इसके अलावा कोई दूसरा रास्ता नहीं है।

राष्ट्रपति ने सेनेगल का दौरा क्यों छोड़ा?
सांविधानिक न्यायाधिकरण के बाहर पुलिस की तैनाती के बीच राष्ट्रपति कारोल नवरोकी ने अपना आधिकारिक सेनेगल दौरा बीच में ही छोड़ने का फैसला किया। उन्होंने एक्स पर लिखा, ऐसे समय में राष्ट्रपति का पोलैंड में होना जरूरी है। मैं सेनेगल के लिए अपनी उड़ान बीच में रोक रहा हूं। मैं वापस लौट रहा हूं।
पोलैंड पहुंचने के बाद नवरोकी ने सुप्रीम कोर्ट के प्रथम अध्यक्ष कापिन्स्की से मुलाकात की। यह मुलाकात न्यायाधिकरण के अधिकारियों को निलंबित करने की कोशिश के बारे में चर्चा करने के लिए हुई थी। यह जानकारी राष्ट्रपति कार्यालय के प्रमुख अधिकारी ने दी।

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चीन में पोलैंड के राजदूत का इस्तीफा 
चीन में पोलैंड के राजदूत याकूब कुमोख ने शुक्रवार शाम इस्तीफा दे दिया। उन्होंने कहा कि देश में हुई घटनाओं को देखते हुए अब राजनयिक पद पर बने रहना ‘संभव नहीं’ है।

विपक्ष ने सरकार पर क्या आरोप लगाए?
लॉ एंड जस्टिस पार्टी के प्रमुख यारोस्लाव काचिंस्की ने टस्क सरकार की आलोचना की। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार सांविधानिक न्यायाधिकरण के खिलाफ सरकारी तंत्र का इस्तेमाल कर रही है। उन्होंने चेतावनी दी कि देश तानाशाही की ओर बढ़ रहा है।

काचिंस्की ने कहा, आज से पोलैंड एक पुलिस राज्य बन गया है। वहां से तानाशाही और फिर सर्वसत्तावाद की ओर जाने का सीधा रास्ता है। उन्होंने आगे कहा, न्यायाधिकरण हमारी आजादी और संप्रभुता की गारंटी है। टस्क की ओर से कानून को रौंदने की कोई सीमा नहीं है।

यूरोपीय संसद के सदस्य अर्कादियुश मुलारचिक ने भी इस घटनाक्रम को तख्तापलट की कोशिश बताया। उन्होंने आरोप लगाया कि मौजूदा सरकार की ओर से भेजे गए अधिकारियों ने गैरकानूनी तरीके से न्यायाधिकरण में घुसने की कोशिश की। उनका आरोप था कि ऐसा मान्यता प्राप्त न्यायाधीशों को रोकने के लिए किया गया।

पूर्व प्रधानमंत्री ने पुलिस कार्रवाई पर क्या कहा?
पोलैंड की पूर्व प्रधानमंत्री और यूरोपीय संसद की सदस्य बीटा शिड्लो ने भी पुलिस कार्रवाई की आलोचना की। उन्होंने कहा, पोलैंड में चौंकाने वाले दृश्य हैं। टस्क सरकार की ओर से भेजी गई पुलिस ने स्वतंत्र सांविधानिक न्यायाधिकरण में जबरन प्रवेश किया है।

उन्होंने यह भी दावा किया कि इमारत और न्यायिक दस्तावेजों की सुरक्षा कर रहे सुरक्षा कर्मचारियों को हटा दिया गया। साथ ही, न्यायाधिकरण के उपाध्यक्ष को अंदर जाने से रोक दिया गया।
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