सीएम योगी आदित्यनाथ सालों बाद पहुंचे अपने पैतृक गांव बिताई रात, जब पुरानी बातें याद कर छलकीं आंखें, वर्षों बाद मां-बेटे के मिलने के खूबसूरत पल।।

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3 दिवसीय दौरे पर उत्तराखंड पहुंचे मुख्यमंत्री योगी का हुआ भव्य स्वागत। पूर्व मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने योगी आदित्यनाथ का उत्तराखंड पहुंचने पर स्वागत किया। उत्तराखंड के लाल योगी आदित्यनाथ मंगलवार को 5 साल बाद अपने गांव पहुंचे। जहां वो अपनी मां सावित्री से मिले। इसके साथ ही परिवार के अन्य सदस्यों व लोगों से भी मुलाकात की। संन्यास के 28 साल बाद योगी आदित्यनाथ यहां रात बिताएंगे। प्रदेश में सीएम योगी के पहुंचने का खासा उत्साह है। उनका भव्य स्वागत समारोह किया गया। करीब पांच साल पहले 2017 में चुनाव से पहले सीएम योगी आदित्यनाथ अपने घर पहुंचे गए थे। यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ ने कहा कि उत्तराखंड से लगातार पलायन हो रहा है। इससे देश की उत्तरी सीमा की सुरक्षा खतरे में है। सीमा की सुरक्षा के लिए पलायन को रोकना जरूरी है। यहां पर्यटन के साथ ईको टूरिज्म और जल संरक्षण के लिए भी कार्य करना होगा। उन्होंने कहा कि राज्य गठन के 21 वर्षों बाद दोनों राज्यों की भाजपा सरकारों ने परिसंपत्तियों के विवाद को भी सुलझा लिया है। घर पहुंचकर योगी आदित्यनाथ ने मां के पैर छूकर आशीर्वाद लिया। वहां मौजूद लोगों के लिए यह पल काफी भावुक कर देने वाला था। इसकी वजह यह थी कि योगी आदित्यनाथ अपनी मां से काफी समय के बाद मिले।

योगी आदित्यनाथ ने मंगलवार शाम महायोगी गुरु गोरखनाथ राजकीय महाविद्यालय बिथ्याणी (यमकेश्वर) में गुरु अवेद्यनाथ की प्रतिमा का अनावरण किया। इस मौके पर जनसभा को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि उनके गुरु की जन्मभूमि भी यमकेश्वर का कांडी क्षेत्र है। जन्मभूमि पर उनकी प्रतिमा का अनावरण कर उन्हें गौरव की अनुभूति हो रही है। कहा कि वह हमेशा से इस क्षेत्र के बच्चों की शिक्षा के लिए चिंतित रहते थे। उनके प्रयासों से 1997 में महाविद्यालय की स्थापना हुई। वर्ष 2005 से महाविद्यालय में कक्षाएं चल रही हैं। अगले सत्र से महाविद्यालय में मानविकी के अलावा विज्ञान की कक्षाएं भी शुरू हो जाएंगी। 
योगी आदित्यनाथ ने कहा कि अच्छी सरकार के आते ही लोगों में भी परिवर्तन देखने को मिलता है। 2014 के बाद देश में परिवर्तन दिख रहा है। अब लोगों में तेज और ओज दोनों दिख रहे हैं। प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व देश निरंतर आगे बढ़ रहा है। उत्तराखंड की जवानी और उत्तराखंड का पानी दोनों ही देश के काम आ रहे हैं। इतिहास पर गौर करें तो जितनी मौतें किसी महामारी से होती थीं, उससे ज्यादा बीमारी के साइड इफेक्ट से होती थीं। लेकिन कोरोना महामारी के दौरान पहली बार कोई साइड इफेक्ट नहीं दिखा। सरकार वैक्सीन तैयार कर लोगों को मुफ्त उपलब्ध कराई। साथ ही राशन भी फ्री दिया गया। यूपी में भी 31.5 करोड फ्री वैक्सीन दी जा चुकी है।
उन्होंने कहा कि काशी विश्वनाथ में पहले पांच फीट सड़क भी नहीं थी और कारिडोर में 50 आदमी भी खड़े नहीं हो पाते थे। अब वहां सड़क चौड़ीकरण कर दिया गया है, वहीं कारिडोर में पांच लाख श्रद्धालु एक साथ खड़े हो सकते हैं। यहां प्रतिदिन एक लाख श्रद्धालु दर्शन के लिए आ रहे हैं। उन्होंने कहा कि राम मंदिर के निर्माण के बाद वहां भी 1.5 लाख श्रद्धालु प्रतिदिन दर्शन के लिए पहुंचेंगे। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड में टूरिज्म की अपार संभावनाएं हैं। यहां हम बहुत कुछ कर सकते हैं। शिक्षा पर काम करना होगा। उन्होंने कहा कि बड़ों की कमियां नहीं अच्छाई को देखें। मां-बाप व गुरुजनों के संस्कारों व शिक्षा पर विश्वास रखें।
योगी ने कहा कि आस्था के नाम पर खुली छूट नहीं दी जा सकती। आस्था का सम्मान ऐसा नहीं होना चाहिए कि हम आमजन की समस्याओं को नजरअंदाज कर दें। 25 करोड़ की आबादी वाले यूपी में कहीं भी सड़क पर नमाज नहीं हुई। एक लाख से अधिक लाउडस्पीकर हटाए जा चुके हैं। अब बच्चों की पढ़ाई बाधित नहीं होती। बीमार और बुजुर्गों को भी कोई परेशानी नहीं हो रही है। गुंडागर्दी भी पूरी तरह समाप्त हो चुकी है। कहा कि हम समस्या से भागने के बजाय उसकी जड़ में जाकर निदान करते हैं।
उत्तराखंड के सीएम पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि मोदी के नेतृत्व में देश और योगी के नेतृत्व में यूपी बदल रहा है। उन्होंने महाविद्यालय में विज्ञान की कक्षाएं संचालित करने की घोषणा की। साथ ही महाविद्यालय में और अधिक संसाधन जुटाने का आश्वासन दिया। जनसभा को पूर्व सीएम त्रिवेंद्र सिंह रावत, गढ़वाल सांसद और पूर्व मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत, कैबिनेट मंत्री धन सिंह रावत व सतपाल महाराज, विधायक रेनू बिष्ट (यमकेश्वर), राजकुमार पोरी (पौड़ी), भाजपा जिलाध्यक्ष संपत सिंह रावत, जिला पंचायत अध्यक्ष शांति देवी, परमार्थ निकेतन ऋषिकेश के अध्यक्ष चिदानंद मुनि महाराज, ओपन यूनिवर्सिटी के निदेशक ओपीएस नेगी, उच्च शिक्षा निदेशक संदीप शर्मा आदि मौजूद रहे। 
कार्यक्रम में गुरु अवेद्यनाथ को याद करते हुए सीएम योगी भावुक हो गए। इस दौरान उनकी आंखें नम हो गईं और कुछ देर तक वह कुछ बोल नहीं पाए। इस दौरान उन्होंने गुरु अवेद्यनाथ के बाल्यकाल और अपने बचपन की यादें ताजा की। कहा कि गुरुजी जीवन के अंतिम क्षणों में भी अपनी जन्मभूमि आना चाहते थे, लेकिन बीमारी के कारण वे उन्हें नहीं ला सके। इस दौरान उन्होंने अपने बचपन की यादें और विद्यार्थी जीवन का जिक्र भाषण में कई बार किया। 

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