राजस्थान और गुजरात में चांदीपुरा वायरस ने एक बार फिर चिंता बढ़ा दी है। बच्चों में तेजी से गंभीर रूप लेने वाला यह संक्रमण सैंड फ्लाई के जरिए फैल सकता है और कुछ मामलों में महज दो-तीन दिनों में जानलेवा साबित हो सकता है। ऐसे में सवाल है कि आखिर चांदीपुरा वायरस क्या है? बच्चों को इससे ज्यादा खतरा क्यों है? और मानसून में इसके मामले बढ़ने की आशंका क्यों रहती है? जानिए …
उस समय स्थानीय स्वास्थ्य विभाग को मामले की जानकारी नहीं मिल पाई थी। बाद में हिम्मतनगर अस्पताल ने जांच से जुड़ी जानकारी गुजरात स्वास्थ्य विभाग को भेजी। मरीज के डूंगरपुर निवासी होने के कारण गुजरात सरकार ने राजस्थान स्वास्थ्य विभाग को इसकी सूचना दी।
18 जुलाई को जानकारी मिलने के बाद डूंगरपुर स्वास्थ्य विभाग ने रतनपुरा गांव में विशेष सर्वे और स्वास्थ्य जांच अभियान शुरू किया। स्वास्थ्य विभाग ने घर-घर जाकर लोगों की स्क्रीनिंग की। इस दौरान किसी दूसरे व्यक्ति में चांदीपुरा वायरस जैसे लक्षण नहीं मिले। एहतियात के तौर पर गांव में लगातार निगरानी रखी जा रही है।
2024 में सरकार ने क्या कदम उठाए थे?
2024 के प्रकोप के दौरान स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने गुजरात सरकार की मदद और बीमारी की विस्तृत जांच के लिए नेशनल जॉइंट आउटब्रेक रिस्पॉन्स टीम तैनात की थी। सैंड फ्लाई जैसे वायरस फैलाने वाले वाहकों को नियंत्रित करने के लिए बड़े स्तर पर कीटनाशकों का छिड़काव और फ्यूमिगेशन किया गया। लोगों और मेडिकल स्टाफ को वायरस, इसके लक्षणों और बचाव के तरीकों की जानकारी देने के लिए जागरूकता अभियान चलाए गए।
चांदीपुरा वायरस से बचाव कैसे किया जा सकता है?
चांदीपुरा वायरस से बचने के लिए सबसे महत्वपूर्ण उपाय सैंड फ्लाई, मच्छर और कीट को नियंत्रित करना और इनके काटने से बचना है। खराब आवास, कचरे का सही प्रबंधन न होना और खुली नालियां सैंड फ्लाई के पनपने और रहने की जगह बढ़ा सकती हैं। इसलिए आसपास साफ-सफाई और वेक्टर कंट्रोल जरूरी है। इसके अलावा लोगों को वायरस के संभावित खतरे, इससे बचने के तरीके, बीमारी के लक्षण और किस स्थिति में जांच व इलाज के लिए अस्पताल जाना चाहिए, इसकी जानकारी देना भी जरूरी है।





