चंडीगढ़- राव नरेंद्र हो सकते हैं दूसरे हरियाणा के प्रदेश कांग्रेस अहीर अध्यक्ष।

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रियाणा प्रदेश कांग्रेस ने जिला अध्यक्षों के चयन के बाद प्रदेश अध्यक्ष के नाम को भी अंतिम रूप देने का मन बना लिया है और इसके लिए पार्टी के हरियाणा मामलों के प्रभारी बी के हरिप्रसाद ने अध्यक्ष पद के दावेदारों का पैनल पार्टी हाई कमान को सौंप दिया है ।
हालात बता रहे हैं कि पार्टी लंबे समय के बाद अहिरवाल से किसी नेता को संगठन की ‌कमान सौंपना चाहती है
इनमें तीन प्रमुख नाम बताए गए हैं ।एक हैं पूर्व मंत्री राव नरेंद्र सिंह दूसरे हैं राव दान सिंह और तीसरे हैं पूर्व मंत्री कैप्टन अजय सिंह यादव। इनमें इनमें राव नरेंद्र सिंह का नाम सबसे आगे चल रहा है और उनके ही अध्यक्ष बनने के आसार नजर आ रहे हैं। यहां एक बात और यह सामने आ रही है कि पार्टी जातीय समीकरणों को साधने के लिए भूपेंद्र सिंह हुड्डा को फिर से विधायक दल का नेता बनाकर जाट समुदाय को प्रतिनिधित्व देना चाहती है । यही हरियाणा विधायक दल की इच्छा भी हो सकती है।यदि राव नरेंद्र अध्यक्ष बनते हैं तो पार्टी गैर जाट पिछड़ा वर्ग और अहिरवाल क्षेत्र को प्रतिनिधित्व देकर एक राजनीतिक बैलेंस भी बनाना चाहेगी। यह भी कि ऐसा हुआ तो राव नरेंद्र दूसरे अहीर नेता होंगे जिन्हें कांग्रेस की यह बागडोर संभालने का मौका मिलेगा। बता दे कि राव निहाल सिंह भी हरियाणा प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष रहे हैं।
हालांकि विधायक दल के नेता के रूप में भी तीन नाम सामने आए हैं। इनमें श्री हुड्डा के अलावा वरिष्ठ नेता और विधायक डॉ रघुवीर कादयान तथा झज्जर की विधायक गीता भुक्कल के नाम शामिल हैं।
राव नरेंद्र अध्यक्ष बने तो यह भी भूपेंद्र सिंह हुड्डा की ही जीत मानी जाएगी क्योंकि इन दोनों के बीच के संबंध तालमेल और अंडरस्टैंडिंग जग जाहिर है।
राव नरेंद्र की अपनी राजनीतिक पृष्ठभूमि है उनके पिता स्वर्गीय राव बंसी सिंह भी हरियाणा में कैबिनेट मंत्री रहे हैं। राव नरेंद्र 2009 में हरियाणा जनहित पार्टी टिकट पर विधायक बने थे परंतु सरकार बनने के समय हजकां का छोड़कर कांग्रेस में शामिल हो गए थे। उस समय तत्कालीन मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने उन्हें स्वास्थ्य मंत्री जैसे महत्वपूर्ण विभाग की जिम्मेदारी दी ।आप समझ सकते हैं कि यह परस्पर अंडरस्टैंडिंग कितनी महत्वपूर्ण हो सकती है।
अब इस बात की संभावना भी बढ़ गई है कि पार्टी हरियाणा की महिला कांग्रेस की अध्यक्ष किसी दलित महिला को बना दे।
भूपेंद्र सिंह हुड्डा के फिर से विधायक दल के नेता बनाए जाने और राव नरेंद्र को प्रदेश अध्यक्ष के रूप में स्थापित करने के आसार के पीछे एक बड़ा आधार यह भी लग रहा है कि बेशक यह दोनों सदस्य नहीं है फिर भी इन्हें बिहार में कांग्रेस के अधिवेशन में आमंत्रित किया गया है।
इस प्रगति से साफ दृष्टिगोचर पर होता है की हालत कुछ भी हो इस तरह की लड़ाई और स्पर्धा में भूपेंद्र सिंह हुड्डा हमेशा बाजी मार ले जाते हैं। उनका राजनीतिक कौशल यह साबित करता है कि राजनीतिक सोच समझ और परिस्थितियों के को अपने अनुकूल बनाने के मामले में हरियाणा में कांग्रेस में उनका कोई सानी नहीं है। अब पार्टी के दूसरे नेताओं की पॉलिटिकल एक्सरसाइज और अंदर खाने विरोध के बावजूद वह एक बार फिर कांग्रेस पर जमा कब्जा जमाते नजर आ रहे हैं ।जहां वे विधायक दल के नेता के रूप में फिर से अपनी भूमिका में नजर आएंगे वहीं अध्यक्ष भी उनकी पसंद का होगा। अब देख लेना जितने जिला अध्यक्ष हैं वह नए अध्यक्ष के पीछे लामबद्ध होते दिखाई देने लगेंगे। लेकिन स्थिति यह भी है कि हरियाणा के कांग्रेस के नये अध्यक्ष की अहमियत पार्टी के नेता राहुल गांधी के यहां बहुत बढ़ जाएगी।

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