राजधानी और आसपास के क्षेत्रों में अमेरिकन और जर्मन कॉकरोच के बीच ब्रिटिश व आयरिश कॉकरॉच घुसपैठ करने में लगा है। बीते कुछ वर्षों से ब्राउन ब्रैंडेड नाम का यह छोटा कॉकरोच घरों के बेडरूम, फ्रिज, सोफे आदि में तेजी से कॉलोनी बना रहे हैं।
देहरादून के लगभग 10 महीने का मौसम इनके लिए मुफीद साबित हो रहा है। ऐसे में पेस्ट कंट्रोल करने वाले विशेषज्ञों ने अब नई रणनीति और अलग पेस्टीसाइड का इस्तेमाल कर इन छोटे कीटों का प्रबंधन शुरू किया है। दरअसल, कॉकरॉच यानी तिलचट्टों की हजारों प्रजातियां पाई जाती हैं मगर इनमें चार या पांच प्रजाति ही घरों और आसपास में रहती हैं।
इनमें सबसे प्रमुख जर्मन और अमेरिकन कॉकरोच हैं। अमेरिकन कॉकरोच ज्यादातर सीवर या अन्य गंदी जगहों पर पाया जाता है। जबकि, जर्मन कॉकरोच का प्रवास लोगों की रसोई में होता है। एग्रीटेक पेस्ट मैनेजमेंट सर्विस के संचालक व विशेषज्ञ सूरज कुमार ने बताया कि देहरादून में अमेरिकन और जर्मन कॉकरोच ही पाए जाते हैं।







