पटना के चर्चित कोचिंग विवाद मामले में यूट्यूबर और शिक्षक फैजल खान उर्फ खान सर की अग्रिम जमानत याचिका पर शुक्रवार को सुनवाई पूरी नहीं हो सकी। जिला एवं सत्र न्यायालय ने मामले की अगली सुनवाई 30 जून को निर्धारित की है। तब तक खान सर की गिरफ्तारी या उनके खिलाफ किसी भी दंडात्मक कार्रवाई पर अंतरिम रोक जारी रहेगी।
25 जून की सुनवाई में क्या हुआ था?
इसे पहले 25 जून यानी गुरुवार को सुनवाई के दौरान अदालत ने पुलिस की कार्यप्रणाली पर सख्त नाराजगी जताई। कोर्ट ने पुलिस द्वारा पेश की गई अपडेटेड केस डायरी को अधूरा बताते हुए जांच एजेंसी को कड़ी फटकार लगाई थी और जल्द से जल्द पूरी केस डायरी पेश करने का आदेश दिया। कोर्ट ने जांच अधिकारी को जल्द से जल्द पूरी रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया था। इधर, रौशन आनंद पक्ष के अभिषेक और गौरव को कोर्ट ने जमानत दे दी थी, जिसके बाद वह बेउर जेल से रिहा हुए।
इसे पहले 25 जून यानी गुरुवार को सुनवाई के दौरान अदालत ने पुलिस की कार्यप्रणाली पर सख्त नाराजगी जताई। कोर्ट ने पुलिस द्वारा पेश की गई अपडेटेड केस डायरी को अधूरा बताते हुए जांच एजेंसी को कड़ी फटकार लगाई थी और जल्द से जल्द पूरी केस डायरी पेश करने का आदेश दिया। कोर्ट ने जांच अधिकारी को जल्द से जल्द पूरी रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया था। इधर, रौशन आनंद पक्ष के अभिषेक और गौरव को कोर्ट ने जमानत दे दी थी, जिसके बाद वह बेउर जेल से रिहा हुए।
विरोधी पक्ष का गंभीर आरोप
इससे पहले, विरोधी पक्ष के अधिवक्ता निरंजन कुमार ने फैजल खान सर की अग्रिम जमानत का कड़ा विरोध किया था। उन्होंने अदालत के सामने दलील दी थी कि इस पूरे विवाद और कथित साजिश खान ग्लोबल स्टडीज के भीतर ही रची गई थी। उन्होंने कहा कि रौशन आनंद द्वारा कदमकुआं थाने में आवेदन दिए जाने के बावजूद अब तक प्राथमिकी दर्ज नहीं की गई है, जबकि इसके पर्याप्त साक्ष्य मौजूद हैं। पीड़ित रौशन आनंद पर जेल के भीतर भी हमले का प्रयास किया गया है और उनके भाई प्रिंस के साथ भी आपराधिक कृत्य हुआ है। इस पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच बेहद जरूरी है।
इससे पहले, विरोधी पक्ष के अधिवक्ता निरंजन कुमार ने फैजल खान सर की अग्रिम जमानत का कड़ा विरोध किया था। उन्होंने अदालत के सामने दलील दी थी कि इस पूरे विवाद और कथित साजिश खान ग्लोबल स्टडीज के भीतर ही रची गई थी। उन्होंने कहा कि रौशन आनंद द्वारा कदमकुआं थाने में आवेदन दिए जाने के बावजूद अब तक प्राथमिकी दर्ज नहीं की गई है, जबकि इसके पर्याप्त साक्ष्य मौजूद हैं। पीड़ित रौशन आनंद पर जेल के भीतर भी हमले का प्रयास किया गया है और उनके भाई प्रिंस के साथ भी आपराधिक कृत्य हुआ है। इस पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच बेहद जरूरी है।








