KBC 18 में बड़ा बदलाव, अब लाइफलाइन भी कमानी पड़ेगी; डायरेक्टर अरुण बोले- इस बार ‘सोचना पड़ेगा’

साल 2000 में जब ‘कौन बनेगा करोड़पति’ शुरू हुआ था, तब जानकारी हासिल करने के लिए किताबें, अखबार और लाइब्रेरी का सहारा लेना पड़ता था। अब 2026 में तस्वीर पूरी तरह बदल चुकी है। टेक्नोलॉजी ने जानकारी को हर किसी की उंगलियों तक पहुंचा दिया है। ऐसे दौर में ‘केबीसी’ के डायरेक्टर अरुण शेषकुमार का मानना है कि अब सिर्फ सही जवाब देना काफी नहीं है। यही कारण है कि इस बार शो की सोच और गेमप्ले, दोनों में बदलाव किया गया है।

अब बात सिर्फ जवाब की नहीं, उसके पीछे की सोच की है
अरुण कहते हैं, ‘2026 में आकर ‘केबीसी’ में बहुत बदलाव आ चुका है। हम एक पूरी नई दुनिया, नए सिस्टम और नए दौर में जी रहे हैं। टेक्नोलॉजी इतनी आगे बढ़ चुकी है कि आज जानकारी हर किसी की उंगलियों पर है। ऐसे में अब बात सिर्फ जवाब की नहीं है बल्कि उस जवाब के पीछे की सोच की है।’
वह आगे कहते हैं, ‘इसी सोच के साथ इस बार पूरे सीजन की थीम ‘सोचना पड़ेगा’ रखी गई है। हम चाहते हैं कि दर्शक सिर्फ ज्ञान लेकर न जाएं, बल्कि गेम की नई रणनीति और नए अनुभव से भी जुड़ें। अब सिर्फ जवाब नहीं, सोच भी उतनी ही अहम होगी।’

जरूरत के हिसाब से बदलाव किए हैं’
अरुण बताते हैं, ‘हर सीजन खत्म होने के बाद पूरी टीम बैठती है। रिसर्च होती है। क्रिएटिव टीम पूरे सीजन का विश्लेषण करती है। हम देखते हैं कि क्या काम किया, क्या नहीं किया और क्यों। फिर तय होता है कि अगले सीजन में क्या नया किया जाए। हमारी कोशिश रहती है कि बदलाव फोर्स्ड न लगे। बदलाव जरूरी है, लेकिन उतना ही जितनी जरूरत हो।’

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‘इस बार हर कदम पर बनानी होगी रणनीति’
इस बार गेमप्ले में भी बदलाव किए गए हैं। अरुण कहते हैं, ‘हमने फिंगर फर्स्ट राउंड को थोड़ा ट्विस्ट किया है। अभी ज्यादा डिटेल नहीं बता सकता, लेकिन इतना जरूर कहूंगा कि हॉट सीट तक पहुंचने का रास्ता पहले से थोड़ा आसान होगा। लेकिन वहां पहुंचने के बाद कंटेस्टेंट को सिर्फ जवाब नहीं देने होंगे, बल्कि हर कदम पर रणनीति भी बनानी होगी।’
वह आगे कहते हैं, ‘लाइफलाइन के तरीके में भी बदलाव किया गया है। इस बार कुछ लाइफलाइन कंटेस्टेंट्स को कमानी पड़ेंगी। हमने गेम में रणनीति का महत्व बढ़ाया है। हालांकि शो की मूल पहचान नहीं बदली है। 16 सवाल होंगे और आखिरी सवाल 7 करोड़ रुपये का ही रहेगा।’

 

जानकारी का सही इस्तेमाल मायने रखता है’
एआई और नई तकनीक के दौर में नॉलेज शो की अहमियत पर अरुण कहते हैं, ‘आज जानकारी उपलब्ध होना बड़ी बात नहीं है। असली बात यह है कि उसका सबसे बेहतर इस्तेमाल कौन करता है। ‘केबीसी’ की सोच हमेशा से यही रही है।’

‘तब लगता है कि हमारी मेहनत सफल हुई’
करीब 22 साल से ‘केबीसी’ से जुड़े अरुण कहते हैं, ‘ऐसा कोई एक पल नहीं है, जिसे मैं सबसे यादगार कह सकूं। हर सीजन में कुछ कहानियां दिल छू जाती हैं। गांवों से आईं कई बेटियां, जिन्हें पढ़ने का मौका भी नहीं मिला, हॉट सीट तक पहुंचीं और अपनी मेहनत के दम पर न सिर्फ रकम जीती, बल्कि यह संदेश भी दिया कि बेटियां किसी से कम नहीं हैं।’
वह आगे कहते हैं, ‘महाराष्ट्र की एक सरकारी स्कूल की शिक्षिका की कहानी आज भी याद है। ‘केबीसी’ से मिली रकम ने सिर्फ उनकी नहीं बल्कि पूरे परिवार की जिंदगी बदल दी। ऐसे पल अहसास कराते हैं कि हम सिर्फ एक गेम शो नहीं बना रहे बल्कि लोगों की जिंदगी में बदलाव का हिस्सा बन रहे हैं।’

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अपने ज्ञान के दम पर लोग आते हैं’
सोशल मीडिया के दौर में कंटेस्टेंट्स में आए बदलाव पर अरुण कहते हैं, ‘आज हर चीज वायरल हो जाती है, लेकिन ‘केबीसी’ वैसा मंच नहीं है। यहां पहुंचने से पहले कंटेस्टेंट्स लिखित परीक्षा और कई चरणों की चयन प्रक्रिया से गुजरते हैं। उनका सामान्य ज्ञान परखा जाता है। हॉट सीट तक वही लोग पहुंचते हैं, जो सचमुच इसके हकदार होते हैं। ‘केबीसी’ ऐसा शो नहीं है, जहां कोई सिर्फ कैमरे पर आने या मशहूर होने के लिए आए। यहां हर कंटेस्टेंट अपने साथ एक कहानी लेकर आता है और अपने ज्ञान के दम पर आगे बढ़ता है।’

 

 

अगले सीजन की तैयारी शुरू हो जाती है’
अरुण बताते हैं, ‘जब तक सीजन ऑन एयर रहता है, हम उसमें कोई बदलाव नहीं करते। लेकिन जैसे ही सीजन खत्म होता है, पूरी टीम बैठती है। हम सिर्फ यह नहीं देखते कि क्या काम किया और क्या नहीं किया, बल्कि यह भी समझते हैं कि कोई चीज काम क्यों कर गई और कोई क्यों नहीं चली। हर साल हमारा सबसे बड़ा सवाल यही होता है कि अगले सीजन में ऐसा क्या नया करें, जिससे शो और दिलचस्प बने, लेकिन उसकी पहचान भी बनी रहे।’
अरुण आगे कहते हैं, ‘हर साल दर्शक बदलते हैं, उनकी पसंद बदलती है। इसलिए हमारी रिसर्च और क्रिएटिव टीम भी उसी हिसाब से काम करती है। हम गेमप्ले में उतना ही बदलाव करते हैं, जितनी जरूरत होती है। कोशिश रहती है कि नई पीढ़ी भी ‘केबीसी’ से जुड़े और लेकिन हम पुराने दर्शकों को खोना नहीं चाहते।

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केबीसी’ की आत्मा अमिताभ बच्चन हैं’
अरुण के मुताबिक ‘केबीसी’ शो की सबसे बड़ी ताकत अमिताभ बच्चन हैं। निर्देशक कहते हैं, ‘वह सिर्फ शो के होस्ट नहीं हैं। शो की सिर्फ शुरुआत और आखिर वाला हिस्सा स्क्रिप्टेड होता है। बाकी बातचीत अमिताभ बच्चन उसी समय कंटेस्टेंट के साथ करते हैं। हर एपिसोड से पहले कंटेस्टेंट्स की प्रोफाइल पढ़ते हैं, उनकी कहानियां समझते हैं और फिर उसी हिसाब से उनसे बातचीत करते हैं। कैमरे पर जो बातचीत दिखती है, उसका बड़ा हिस्सा उसी पल बनता है। वह हर कंटेस्टेंट की बॉडी लैंग्वेज महसूस करते हैं, उसे सहज करते हैं और खुलकर अपनी कहानी बताने के लिए प्रेरित करते हैं। मेरे लिए ‘केबीसी’ की आत्मा अमिताभ बच्चन हैं।’

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