अयोध्या- भक्ति-संस्कृति की इंद्रधनुषीय छटा सराबोर हो रहा बड़ा भक्तमाल

Spread the love

 

विंदुगद्याचार्य स्वामी देवेन्द्रप्रसादाचार्य, महंत कौशल किशोर दास महाराज ने भक्तमाल की कथा का किया उद्घाटन

 प्रभु श्रीराम की जन्मभूमि अयोध्या इन दिनों भक्तिरस में सराबोर है। बड़े भक्तमाल के संस्थापक और श्रीराम के अनन्य भक्त महंत रामशरण दास जी महाराज के 50वें साकेतोत्सव का आयोजन इस बार विशेष रूप से भव्य हो रहा है। यह आयोजन ऐसे समय में हो रहा है जब श्रीराम मंदिर निर्माण अपने पूर्णत्व की ओर अग्रसर है, जिससे इस उत्सव का आध्यात्मिक, सांस्कृतिक और सामाजिक महत्व कई गुना बढ़ गया है। अयोध्या की पावन धरती पर इन आध्यात्मिक अनुष्ठानों की सुगंध ने पूरे नगर को भक्तिरस और भक्ति-संस्कृति की इंद्रधनुषीय छटा से आच्छादित कर दिया है। श्री महाराज जी के 50वें साकेतोत्सव का शुभारंभ आज प्रातः 8 बजे मानस नवाह पारायण, भक्तमाल पारायण, चतुर्वेद पारायण, अष्टादश पुराण पारायण एवं नाम संकीर्तन के साथ हुआ। संपूर्ण कार्यक्रम में भक्तमाल मंदिर के बड़े महाराज महंत कौशल किशोर दास जी महाराज अपनी सानिध्यता प्रदान कर रहे हैं, जबकि वर्तमान पीठाधीश्वर महंत अवधेश कुमार दास जी महाराज कार्यक्रम के संयोजन में सक्रिय रूप से जुटे हुए हैं। भक्तमाल कथा का उद्घाटन दशरथ महल बड़ा स्थान के महंत विंदुगद्याचार्य स्वामी देवेन्द्रप्रसादाचार्य ने किया। कथा के प्रथम सत्र में जगतगुरु रामानुजाचार्य डॉ. स्वामी राघवाचार्य महाराज ने भक्तों के चरित्र पर प्रकाश डालते

हुए कहा कि “भक्त ही भगवान को प्रकट होने के लिए बाध्य कर देता है।” उन्होंने बताया कि भक्तमाल महाभागवत श्रीनाभादास जी महाराज की रचना है, जो भक्तों के पावन चरित्रों की सुगंधित माला के समान है। यह माला ऐसी है जिसे स्वयं परमात्मा श्रीहरि अपने कंठ में धारण करते हैं। स्वामी जी ने कहा कि भक्तमाल के श्रवण और मनन से शुष्क हृदय भी सरस हो जाता है तथा भक्ति की लहरें निरंतर आंदोलित रहती हैं। यही कारण है कि श्रीमद्भागवत और रामकथा के प्रवचनों में आचार्यगण भक्तमाल के भक्तों का उदाहरण देकर भक्तिरस को पुष्ट करते हैं।

और पढ़े  मुठभेड़ में 50 हजार का इनामी बदमाश ढेर, खंद्रावली पुलिस चौकी के पास आज तड़के एनकाउंटर,दरोगा भी घायल

इस अवसर पर महंत अवधेश कुमार दास महाराज ने अतिथियों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि बड़े भक्तमाल जी महाराज भक्ति और प्रेम के प्रतिमूर्ति थे। उनके 50वें साकेतोत्सव पर प्रभु श्रीराम की जन्मभूमि में सेवा करना और रामभक्तों का सम्मान करना ही हमारा लक्ष्य है। उन्होंने बताया कि यह आयोजन 5 नवंबर तक चलेगा। इस दौरान उनके शिष्य कृष्ण गोपाल दास महाराज कार्यक्रम को सफल बनाने में पूर्ण समर्पण के साथ जुटे हुए हैं। आज की कथा में डॉ सुनीता शास्त्री, जानकी घाट बड़ा स्थान के महंत जन्मेजय शरण, महंत रामजी शरण साहित्य सैकड़ो संत महंत गृहस्थ भक्तगण उपस्थित रहे।


Spread the love
  • Related Posts

    अयोध्या: चढ़ावा चोरी की वजह से भंग हो सकता है राम मंदिर ट्रस्ट, वैष्णो देवी श्राइन बोर्ड की तरह होगी व्यवस्था

    Spread the love

    Spread the loveराममंदिर में चढ़ावा चोरी प्रकरण के बाद श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के प्रशासनिक ढांचे में बड़े बदलाव की चर्चा तेज हो गई है। ट्रस्ट महासचिव चंपत राय…


    Spread the love

    लखनऊ में 1 लाख के इनामी बदमाश का एनकाउंटर, बिल्डर संदीप सिंह हत्याकांड का था मुख्य आरोपी

    Spread the love

    Spread the love   उत्तरप्रदेश की लखनऊ पुलिस को आज एक बड़ी सफलता हाथ लगी है। जनपद के इंदिरा कैनाल रोड पर पुलिस टीम के साथ हुई एक मुठभेड़ के…


    Spread the love