दिल के मरीजों को बेहतर इलाज देने के लिए सुशीला तिवारी अस्पताल में 12 करोड़ से तैयार कैथ लैब अब खुद बीमार होने लगी है। विडंबना देखिए कि हाईटेक लैब को पांच महीने बीतने के बाद भी कार्डियोलॉजिस्ट (हृदयरोग विशेषज्ञ) नहीं मिल सका है। मरीज तो दूर की बात है, डॉक्टरों के अभाव में धूल फांक रही इस लैब पर अब बरसात की सीलन ने साइलेंट अटैक कर दिया है।
कॉलेज प्रबंधन कर रहा प्रयास
सांसद अजय भट्ट दो बार कैथ लैब का निरीक्षण कर चुके हैं। हल्द्वानी विधायक सुमित हृदयेश भी कैथ लैब संचालन में सहयोग का आश्वासन दे चुके हैं। अस्पताल प्रबंधन कार्डियोलॉजिस्ट की व्यवस्था के लिए लंबे समय से प्रयास कर रहा है। दो माह पहले मेडिकल कॉलेज में इंटरव्यू में एक कार्डियोलॉजिस्ट का चयन हुआ था। पर उन्होंने ज्वाइन नहीं किया है।
लैब में तीन एसी 24 घंटे चालू, बिजली का खर्च बढ़ा
कैथ लैब में लगे तीन एसी 24 घंटे चालू रखे जा रहे हैं। अस्पताल प्रशासन का कहना है कि कैथ लैब में संवेदनशील मशीनें और उपकरण लगे हैं। नमी और तापमान नियंत्रित रखने के लिए एसी को लगातार चलाना जरूरी है। सूत्रों के अनुसार तीनों एसी पर हर महीने 40 से 50 हजार रुपये तक का अतिरिक्त खर्च आ रहा है।
कैथलैब के एक कोने में सीलन है, उसे जल्द ठीक कराया जाएगा। विशेषज्ञ डॉक्टर लाने का प्रयास किया जा रहा है। पहले एक डॉक्टर थे जो अब चले गए हैं। उनकी जगह नए डॉक्टर की तैनाती के लिए शासन स्तर पर पत्राचार किया गया है। डॉक्टर उपलब्ध होते ही कैथ लैब की सेवाएं तुरंत शुरू कर दी जाएंगी। – डॉ. अरुण जोशी, एमएस सुशीला तिवारी अस्पताल
इंटरव्यू में जिस विशेषज्ञ का चयन हुआ था, उन्होंने आने से मना कर दिया है। जल्द इंटरव्यू कराकर कैथ लैब शुरू कराई जाएगी। – डॉ. अजय आर्य निदेशक, चिकित्सा शिक्षा
एसटीएच की कैथ लैब में कार्डियोलाजिस्ट की तैनाती के लिए विभागीय अधिकारियों को निर्देश जारी किए हैं। शासन स्तर पर भी कार्डियोलाजिस्ट की तैनाती के लिए वार्ता की गई है। – अजय भट्ट, सांसद, नैनीताल ऊधमसिंह नगर








