अयोध्या: अयोध्या की धरती से एक और नया इतिहास रचा स्वामी महेश योगी ने

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अयोध्या: अयोध्या की धरती से एक और नया इतिहास रचा स्वामी महेश योगी ने

सिद्घपीठ श्री हनुमानगढ़ी में 1100 घण्टे में ( 10000000 ) एक करोड़ स्ट्रोक कपालभाति प्राणायाम करने का बनाया विश्व कीर्तिमान।
– 1980 घंटे में लगभग 1 करोड़ 51 लाख स्ट्रोक कपालभाति करने का रहा कठोर दृढ़ संकल्प।
– छः माह तक अन्न का त्यागकर 11 घण्टे प्रतिदिन कर रहे कपालभाति प्रणायाम की हठयोग साधना।
– आज हनुमानगढ़ पीठ में लगातार 19 घंटे किया कपालभाति प्राणायाम
अयोध्या, सिद्धपीठ श्री हनुमानगढ़ी बसंतिया पट्टी के लोकप्रिय संत, श्री हनुमान जी के अनन्य भक्त, डा. महेश दास उर्फ स्वामी महेश योगी ने हनुमान जी को साक्षी मानकर 2 अप्रैल 2024 से अन्न का त्याग कर प्रतिदिन 11 घंटे कपालभाति करने का संकल्प लिया था। आज सिद्धपीठ श्री हनुमानगढ़ी में श्री हनुमान जी के सम्मुख ( प्रातः 4 बजे ) मंगला आरती से ( रात्रि 11बजे ) शयन आरती तक कपालभाति किया तथा अनवरत साधना के सौ दिन पुर्ण हुए। इन्होंने 100 दिन की साधना पुर्ण करने के साथ ही लगभग 1100 घण्टे में कपालभाति प्राणायाम के एक करोड़ स्ट्रोक लगाकर एक आश्चर्य जनक विश्व कीर्तिमान बनाकर पूरी दुनिया में अयोध्या धाम का गौरव बढ़ाया है।
स्वामी महेश योगी ने निराहार रहकर लगातार 80 दिनों में अष्टसिद्धि योग साधना पूर्ण की तत्पश्चात अब 71 दिनों तक रूद्र राजयोग की साधना कर रहे हैं। स्वामी जी की यह साधना एक कठोर दृढ़ संकल्प की पूर्ति के लिए है इनका उद्देश्य है भारत के चारों दिशाओं में चार दिव्य योगधाम की स्थापना करना है, जिसमें ( पश्चिम भारत गुजरात में रूद्र धाम, उत्तर भारत जम्मू कश्मीर में हनुमत धाम, दक्षिण भारत केरल में रामेष्ठ धाम, पूर्वी भारत मेघालय में पिगाक्ष धाम) तथा अयोध्या की पावन भूमि पर ब्रह्मर्षि वशिष्ठ योगपीठ की स्थापना।
यह योग धाम आध्यात्मिक केंद्र के साथ-साथ प्राचीन भारतीय संस्कृति के अनुरूप योगतत्व, ज्ञानतत्व, ऋषि दर्शन, वैदिक दर्शन, धार्मिक शिक्षा व साधना का प्रमुख केन्द्र होगा जहां से भारत की भावी पीढ़ी सनातनी संस्कार ग्रहण कर सके जिससे योग, आध्यात्म, तप, साधना, संस्कार एवं अनुसंधान के पथ पर नए भारत का अभ्युदय हो और भारत विश्वगुरु के रूप में पुनर प्रतिष्ठित हो।
14 वर्ष की उम्र से ही संत जीवन में रह रहे स्वामी महेश योगी ने पूर्व में भी अनेकों आश्चर्यजनक विश्व कीर्तिमान स्थापित किया है। शिक्षा जगत के कई बड़े पदों पर भी कार्य कर चुके हैं। योग, कला, साहित्य व आध्यात्म के क्षेत्र में अपने साधक शिष्यों के साथ अंतरराष्ट्रीय फलक पर अब तक 114 विश्व कीर्तिमान स्थापित कर दुनिया के फलक पर अयोध्या समेत भारत का गौरव बढ़ाया है।
जिसके उपलक्ष्य में उन्हें अनेकों विश्व खिताबों के साथ साथ भारत गौरव सम्मान, जयप्रकाश नारायण ( जेपीअवार्ड), गवर्नर अवॉर्ड, पूर्वांचल गौरव सम्मान, अयोध्या गौरव, सिद्धार्थ नगर रत्न, साहित्य भूषण, कला शिक्षक श्री, राष्ट्रीय योग रत्न, महर्षि धन्वंतरि सम्मान आदि विविध सम्मान प्राप्त हैं। सन 2022 में चित्रकूट, तुलसी पीठाधीश्वर, पद्म विभूषण, जगद्गुरू श्री रामभद्राचार्य जी महाराज ने स्वामी महेश योगी को ” ब्रह्मर्षि ” की उपाधि से भी विभूषित किया।

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