अयोध्या- कबाड़घर बन गए शहर में बने बाल वाटिका केंद्र

 

 समग्र शिक्षा अभियान और नई शिक्षा नीति के तहत तीन से छह वर्ष के बच्चों की प्रारंभिक शिक्षा को मजबूत करने के लिए शुरू की गई बाल वाटिका योजना कागजों में भले ही आदर्श दिखती हो, लेकिन विद्यालय में स्थिति कुछ और ही है। नगर क्षेत्र की कई बाल वाटिकाओं को कबाड़ घर बना दिया गया है।

जिले के 1791 परिषदीय विद्यालयों में अगले वर्ष तक बाल वाटिका संचालित करने की तैयारी है। पिछले वर्ष सितंबर माह में सात विकास खंडों में 22 बाल वाटिका को मॉडल के रूप संचालन शुरू किया गया था। इसमें बच्चों को खेल-खेल में अक्षर ज्ञान, संख्या ज्ञान, कहानी और सामाजिक व्यवहार बच्चों को सिखाने का जिम्मा उठाया गया था, जिससे कक्षा एक में प्रवेश से पहले उनमें पढ़ने-लिखने की समझ हो सके।

इसके लिए खिलौने, शैक्षिक किट, खेल सामग्री और प्रशिक्षित शिक्षक उपलब्ध कराने का दावा किया गया है लेकिन वास्तविकता में कई बाल वाटिकाएं सिर्फ नाम की रह गई हैं। बीएसए का कहना है कि बिना एजुकेटर के बच्चे कैसे पढ़ेंगे। अभी एजुकेटर की नियुक्ति की प्रक्रिया चल रही है। बीएसए लालचंद ने बताया कि बाल वाटिका के संबंध में जानकारी कर रहे हैं। बाल वाटिका में पूर्व एजुकेटर नियुक्ति प्रक्रिया शासन के निर्देश के बाद रद्द कर दिए गया था। दोबारा एजुकेटर की नियुक्ति कराने की प्रक्रिया चल रही है।

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