स्वतंत्रता संग्राम सेनानी स्वर्गीय राजबली यादव और पूर्व सांसद एवं पूर्व विधायक स्वर्गीय बाबू मित्र सेन यादव की स्मृतियों को अयोध्या की धरती पर स्थायी रूप देने का ऐलान समाजसेवी संस्था अयोध्या धाम के राष्ट्रीय अध्यक्ष सुरेश यादव ने किया है। उन्होंने दोनों महापुरुषों को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि उनके संघर्ष, विचार और जनसेवा की विरासत को आने वाली पीढ़ी तक पहुंचाना उनकी प्राथमिकता है। समाजसेवी सुरेश यादव ने स्वर्गीय राजबली यादव के चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित कर उन्हें नमन किया। उन्होंने कहा कि कामरेड स्वतंत्रता संग्राम सेनानी राजबली यादव ने गरीबों, दीन-दुखियों और शोषित वर्ग के अधिकारों के लिए सामंतवादी व्यवस्था के खिलाफ संघर्ष किया। उनका पूरा जीवन समाज के कमजोर तबके की आवाज उठाने में बीता। ऐसे महापुरुषों के विचारों को कभी भुलाया नहीं जा सकता।सुरेश यादव ने अपने पारिवारिक रिश्ते का उल्लेख करते हुए कहा कि उनके पिता स्वर्गीय भदई यादव को राजबली यादव अपने पुत्र के समान मानते थे। उन्होंने कहा कि यह पारिवारिक और वैचारिक रिश्ता आज भी उनके लिए प्रेरणा का स्रोत है।
विधायक बने तो लगाएंगे दोनों महापुरुषों की प्रतिमा
कार्यक्रम के दौरान सुरेश यादव ने घोषणा की कि यदि वह क्षेत्र से विधायक बनते हैं तो अयोध्या की पावन धरती पर स्वतंत्रता संग्राम सेनानी स्वर्गीय राजबली यादव और अपने राजनीतिक गुरु स्वर्गीय बाबू मित्र सेन यादव की भव्य प्रतिमाएं स्थापित कराएंगे। उन्होंने कहा कि दोनों महापुरुषों का समाज और क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण योगदान रहा है। उनकी प्रतिमाएं केवल स्मारक नहीं, बल्कि युवाओं और आने वाली पीढ़ी के लिए संघर्ष, सामाजिक न्याय और जनसेवा की प्रेरणा का केंद्र होंगी।उन्होंने कहा कि पूर्व सांसद एवं पूर्व विधायक स्वर्गीय बाबू मित्र सेन यादव अयोध्या से सांसद और मिल्कीपुर से विधायक रहे। उनके राजनीतिक एवं सामाजिक जीवन से उन्हें लगातार प्रेरणा मिली है।
‘कुर्सी नहीं, सेवा मेरा लक्ष्य’
अपने राजनीतिक भविष्य को लेकर सुरेश यादव ने कहा कि जनसेवा किसी पद की मोहताज नहीं होती। सांसद या विधायक बनना उनका अंतिम लक्ष्य नहीं, बल्कि जनता की सेवा करना उनका संकल्प है। पद मिले या न मिले, जीवनभर गरीब और किसान परिवारों के बच्चों की पढ़ाई, जरूरतमंदों के इलाज और आर्थिक मदद के लिए वह अपनी क्षमता के अनुसार कार्य करते रहेंगे।








