दिल्ली HC में अरविंद केजरीवाल की पेशी, जज बदलने की याचिका पर आज आएगा फैसला

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बकारी नीति मामले में आज हाईकोर्ट अरविंद केजरीवाल की रिक्यूजल याचिका पर अपना फैसला सुनाएगा। केजरीवाल दिल्ली हाईकोर्ट में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए पेश हुए। इस दौरान केजरीवाल ने अपना जवाबी हलफनामा रिकॉर्ड पर लेने की मांग की। सुनवाई को दौरान केजरीवाल ने कहा, मैडम अगर मेरा जवाब रिकॉर्ड पर नहीं लिया गया तो यह न्याय के प्रति लापरवाही होगी।

सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने इसका विरोध करते हुए कहा, पूरे देश में जब भी फैसला सुरक्षित हो जाता है तो ऐसे में कोई भी एडिशनल एफिडेविट रिकॉर्ड पर नहीं लिया जाता लेकिन अदालत ने फिर भी केजरीवाल के एडिशनल एफिडेविट को रिकॉर्ड पर लिया है।

वहीं, न्यायमूर्ति शर्मा ने कहा, सॉलिसिटर जनरल सही कह रहे हैं, जो न्यायिक प्रक्रिया है वह सभी लोगों पर बराबर है किसी व्यक्ति विशेष के लिए बदली नहीं जा सकती। हालांकि, अदालत ने चुकि केजरीवाल स्वयं अपना पक्ष रख रहे थे ऐसे में उन्हें थोड़ी राहत देते हुए एडिशनल एफिडेविट को रिकॉर्ड पर ले लिया।

अदालत में केजरीवाल के जवाब को रिकॉर्ड पर लिया  है। अदालत ने केजरीवाल को बताया कि इस मामले में 4:30 बजे आज फैसला आना है। न्यायमूर्ति स्वर्ण कांता शर्मा ने 13 अप्रैल को केजरीवाल की रिक्यूजल याचिका पर अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था। चार घंटे से अधिक समय तक हुई लंबी सुनवाई में दोनों पक्षों ने तीखी बहस की, जिसमें केजरीवाल ने खुद कोर्ट में पेश होकर दलीलें रखीं थी।

इससे पहले हाईकोर्ट ने केजरीवाल की ओर से दाखिल नये हलफनामे को रिकॉर्ड पर लेने का आदेश दिया था। हलफनामे में केजरीवाल ने दावा किया कि न्यायमूर्ति शर्मा के बच्चे केंद्र सरकार के एमपैनल्ड वकील हैं, जिन्हें सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता के जरिये काम मिलता है। मेहता सीबीआई की ओर से पेश हो रहे हैं। ऐसे में जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा तुषार मेहता के खिलाफ आदेश कैसे जारी कर पाएंगी? केजरीवाल ने कहा, यह ‘डायरेक्ट कॉन्फ्लिक्ट ऑफ इंटरेस्ट’ है, जिससे उनकी रिक्यूजल (खुद को मामले से अलग करने) की मांग और मजबूत हो गई है।

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आरटीआई दस्तावेजों का हवाला देते हुए केजरीवाल ने कहा कि न्यायमूर्ति के बेटे को 2023 में 2,487, 2024 में 1,784 और 2025 में 1,633 मामले आवंटित किए गए। उन्होंने कहा कि ये तथ्य रिक्यूजल याचिका दाखिल करने के बाद उनके संज्ञान में आए। केजरीवाल ने 13 अप्रैल को भी जज पर कई आपत्तियां जताई थीं।

सीबीआई ने केजरीवाल के इस तर्क को पूरी तरह खारिज किया। सीबीआई ने अपने हलफनामे में कहा, ‘केजरीवाल की इस दलील को स्वीकार किया जाए कि न्यायमूर्ति शर्मा इसलिए रिक्यूज हो जाएं, क्योंकि उनके बच्चे केंद्र सरकार की पैनल में हैं, तो देश भर के सभी जज जिनके रिश्तेदार किसी भी सरकारी पैनल पर हैं, उन्हें संबंधित सरकारों या राजनीतिक नेताओं के मामलों की सुनवाई करने से वंचित कर दिया जाएगा। इस तर्क को बढ़ा-चढ़ाकर लागू किया जाए तो सभी राज्य सरकारों, केंद्र सरकार या सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों से जुड़े मामलों में ऐसे सभी जज अयोग्य माने जाएंगे जिनके रिश्तेदार इनकी पैनल पर हैं।’

सीबीआई ने यह भी कहा था कि केजरीवाल की इस तर्क के आधार पर तो उन कानून अधिकारियों को भी सभी ऐसे जजों के सामने पेश होने से अयोग्य ठहरा दिया जाएगा जो पैनल वकीलों को केस आवंटित करते हैं। एजेंसी ने केजरीवाल द्वारा दायर अतिरिक्त हलफनामे को बाद का सोचा-समझा कदम करार देते हुए आरोप लगाया कि इसका मकसद अदालती संस्था और व्यक्तियों को बदनाम करना तथा दबाव बनाना है।


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