राफेल विमान: केंद्र से 114 अतिरिक्त राफेल लड़ाकू विमानों की खरीद को मिली मंजूरी, सीसीएस में लगेगी अंतिम मोहर

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भारत की वायु रक्षा क्षमता को मजबूत करने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाते हुए केंद्र सरकार ने 114 अतिरिक्त राफेल लड़ाकू विमानों की खरीद के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। रक्षा खरीद बोर्ड द्वारा इस प्रस्ताव को हरी झंडी मिलना इस बहुप्रतीक्षित सौदे की पहली बड़ी औपचारिक सफलता मानी जा रही है।

 

सरकारी सूत्रों ने बताया कि रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह की अध्यक्षता वाले रक्षा खरीद बोर्ड ने शुक्रवार को हुई बैठक में इस आशय का प्रस्ताव मंजूर कर लिया। यह प्रस्ताव अब रक्षा अधिग्रहण परिषद के पास जाएगा, जिसकी अध्यक्षता रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह करेंगे। इसके बाद लागत पर बातचीत होगी और अंततः इस सौदे को कैबिनेट कमेटी ऑन सिक्योरिटी से अंतिम मंजूरी लेनी होगी।

 

पीएम मोदी और फ्रांस राष्ट्रपति मैक्रों की मुलाकात के दौरान अंतिम रूप देने की कोशिश
सूत्रों का कहना है कि भारत और फ्रांस इस अहम रक्षा समझौते को फरवरी में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों की प्रस्तावित मुलाकात के दौरान अंतिम रूप देने की कोशिश कर रहे हैं। इससे भारत-फ्रांस के बीच रक्षा सहयोग को नई गति मिलने की उम्मीद है। 114 नए राफेल विमानों की खरीद से भारतीय वायुसेना की मारक क्षमता, तकनीकी बढ़त और रणनीतिक ताकत में उल्लेखनीय इजाफा होगा। खासकर मौजूदा सुरक्षा चुनौतियों के बीच यह सौदा भारत की रक्षा तैयारियों को और मजबूत करेगा।

3.25 लाख करोड़ का रक्षा सौदा
भारत सरकार जिस राफेल लड़ाकू विमान डील पर काम कर रही है, उसकी कुल लागत करीब 3.25 लाख करोड़ रुपये (लगभग 36 अरब डॉलर) बताई जा रही है। यह सौदा अब तक का भारत का सबसे बड़ा रक्षा सौदा माना जा रहा है। इसके तहत कुल 114 राफेल विमान खरीदे जाएंगे। इनमें से 12 से 18 विमान फ्रांस से सीधे तैयार हालत में भारत लाए जाएंगे, जबकि बाकी विमानों का निर्माण भारत में होगा।

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‘मेक इन इंडिया’ को मिलेगा बड़ा बढ़ावा
इस डील में ‘मेक इन इंडिया’ पर भी खास जोर दिया गया है। शुरुआती दौर में विमानों में करीब 30 प्रतिशत स्वदेशी उपकरण और सामग्री इस्तेमाल होगी, जिसे आगे बढ़ाकर 60 प्रतिशत तक करने की योजना है। आमतौर पर ऐसे सौदों में 50–60 प्रतिशत स्वदेशी हिस्सेदारी की शर्त होती है, जिसे चरणबद्ध तरीके से पूरा किया जाएगा।

भारत चाहता है कि इन राफेल विमानों में भारतीय हथियार और सिस्टम लगाए जाएं, हालांकि विमानों के सॉफ्टवेयर के सोर्स कोड फ्रांस के पास ही रहेंगे। अगर यह सौदा अंतिम रूप लेता है, तो भारत के पास कुल 176 राफेल लड़ाकू विमान हो जाएंगे। फिलहाल वायुसेना के पास 36 राफेल हैं और 26 राफेल नौसेना के लिए पहले ही ऑर्डर किए जा चुके हैं।

ऑपरेशन सिंदूर में खास रहा राफेल का प्रदर्शन
राफेल लड़ाकू विमान को प्राथमिकता देने की सबसे बड़ा कारण उसका ऑपरेशन सिंदूर के दौरान प्रदर्शन रहा। इस दौरान राफेल ने पाकिस्तानी मिसाइलों को मात दी और दुश्मनों के छक्के छुड़ा दिए। बता दें कि फ्रांस की कंपनी डासौल्ट भारत में राफेल के M-88 इंजन की मरम्मत और रख-रखाव सुविधा भी बनाएगी। भारतीय कंपनियां जैसे टाटा भी विमान निर्माण और मरम्मत में शामिल होंगी।


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