Amit Shah in Bihar-  तीन दिन सीमांचल में रहेंगे शाह, एजेंडा क्या है? किस मुद्दे पर महामंथन करेंगे?

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केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह तीन दिवसीय बिहार दौरे पर बुधवार शाम पहुंच चुके। पूर्णिया एयरपोर्ट पर डिप्टी सीएम सम्राट चौधरी मंत्री लेशी सिंह और भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष संजय सरावगी ने उनका स्वागत किया। यहां से वह सड़क मार्ग से किशनगंज पहुंचे। यहां पर लैंड पोर्ट अथॉरिटी की समीक्षा बैठक में शामिल हुए। किशनगंज में ही रात्रि विश्राम किया। आज यानी गुरुवार को गृह मंत्री अररिया में रहेंगे, जहां वह सुबह 11 बजे लेट्टी सीमा चौकी पर आयोजित एक कार्यक्रम में भाग लेंगे। इसके बाद कलेक्ट्रेट में पुलिस अधीक्षकों और सीमावर्ती क्षेत्रों के जिला अधिकारियों के साथ भारत-नेपाल सीमा से संबंधित मुद्दों का आकलन करने के लिए एक उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक करेंगे, जिसमें सुरक्षा को लेकर बातचीत होगी। आज ही वह दूसरे चरण की वाइब्रेंट विलेजेज कार्यक्रम के तहत आयोजित एक कार्यक्रम में भी भाग लेंगे और फिर रात रुकने के लिए पूर्णिया लौटेंगे। शुक्रवार यानी 27 फरवरी को गृह मंत्री शाह पूर्णिया में सीमावर्ती जिलों से संबंधित मामलों पर विचार-विमर्श करने के लिए एक बार फिर अधिकारियों से मुलाकात करेंगे। समीक्षा बैठकों के अंतिम दौर के समापन के बाद वे नई दिल्ली के लिए रवाना होंगे। यह तो थी अमित शाह के कार्यक्रम की जानकारी आगे आपको बताते हैं अमित शाह के कार्यक्रम का एजेंडा क्या है?

 

यह यात्रा मुख्य रूप से सीमा सुरक्षा को लेकर है’
वरिष्ठ पत्रकार गिरिंद्र नाथ झा ने कहा कि गृह मंत्री की यह यात्रा मुख्य रूप से सीमा सुरक्षा को लेकर है। इसमें सिलिगुड़ी कॉरिडोर का मुद्दा प्रमुख है। दूसरी जो महत्वपूर्ण बात है वह यह कि केंद्र सरकार वाइब्रेंट विलेज के कार्यक्रम पर भी काम कर रही है। गृह मंत्री का इस कार्यक्रम पर काफी फोकस है। अररिया में वह वाइब्रेंट विलेजेज कार्यक्रम के तहत आयोजित एक कार्यक्रम में भी भाग लेंगे। इसके साथ ही वह सीमावर्ती जिलों में सुरक्षा उपायों, प्रशासनिक तैयारियों और चल रही विकास पहलों की समीक्षा करेंगे। इस दौरान वे भारत-नेपाल सीमा से लगे क्षेत्रों को लेकर अधिकारियों के साथ बैठक करेंगे।

‘बंगाल के कुछ प्रमुख नेता मुलाकात करने आएंगे’
गृह मंत्री अमित शाह के इस दौरे का बंगाल चुनाव से जोड़कर देखा जाए या नहीं? इस सवाल पर वरिष्ठ पत्रकार गिरिंद्र नाथ झा ने कहा कि बंगाल चुनाव से इसे नहीं जोड़ना उचित नहीं होगा। अगर बंगाल चुनाव मुद्दा रहता तो वह बंगाल में ही प्रवास करते हैं। वह सीमा सुरक्षा पर बातचीत करने आए हैं। हां, सीमावर्ती जिले जैसे उत्तर और दक्षिण दिनाजपुर या अन्य जिलों के कुछ नेता गृह मंत्री से मुलाकात करने जरूर आएंगे।

‘सीमांचल दौरे के दो मायने निकाले जा रहे’
वरिष्ठ पत्रकार प्रवीण बागी कहते हैं कि अमित शाह के सीमांचल दौरे के दो मायने निकाले जा रहे हैं। पहला यह कि भारत सरकार सीमांचल को घुसपैठियों से मुक्त बनाने पर विशेष ध्यान दे रही है। गृह मंत्री शाह ने हाल के वर्षों में कई बार सीमांचल का दौरा किया है। विधानसभा चुनाव के दौरान भी वह कई बार घुसपैठियों का मुद्दा उठा चुके हैं। उन्होंने आरोप भी लगाया था कि क्षेत्र में अवैध प्रवासियों के माध्यम से वोट बैंक बनाने के प्रयास चल रहे हैं। सभी अवैध गतिविधियों को पूरी तरह से रोक लगाने की बात कही थी।

‘इन चीजों पर भी मंथन करेंगे अमित शाह’
वरिष्ठ पत्रकार प्रवीण बागी ने कहा कि दूसरी बात यह है कि सीमांचल के जिलों की सीमा पश्चिम बंगाल से सटती है। इस सीमवर्ती गांवों में सैकड़ों ऐसे लोग हैं जिनका संबंध बंगाल से भी है। उत्तर दिनाजपुर और दक्षिण दिनाजपुर के विधानसभा सीटों पर भाजपा फोकस कर रही है। किशनगंज और पूर्णिया में रात्रि विश्राम के दौरान वह सीमावर्ती जिलों के कुछ प्रमुख नेताओं से मिलकर रणनीति बना सकते हैं। इसके अलावा घुसपैठियों का मुद्दा भी है। यह कॉमन मुद्दा है जो कि सीमांचल और बंगाल में दोनों जगहों पर है। इसके अलावा बार्डर पर सुरक्षा को कैसे मजबूत किया जाए? इन चीजों पर भी मंथन करेंगे।

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गृह मंत्री के दौरे पर भाजपा ने क्या कहा?
भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष संजय सरावगी ने कहा कि भाजपा कार्यकर्ताओं की ओर से हमलोग गृह मंत्री का स्वागत करते हैं। गृह मंत्री का घुसपैठ के मुद्दे पर सख्त रूख है। वह घुसपैठियों को हर हाल में देश के बाहर करना चाहते हैं। आतंकवाद और आतंरिक सुरक्षा पर भी उनका काफी फोकस है। तीन दिवसीय दौरे पर वह इन्हीं मुद्दों पर फोकस करेंगे।

तेजस्वी यादव गृह के सीमांचल दौरे पर क्या बोले?
तेजस्वी यादव ने गृह मंत्री अमित शाह के सीमांचल दौरे पर भी हमला बोला। उन्होंने कहा कि पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव को ध्यान में रखकर की जा रही राजनीतिक कवायद है। उन्होंने कहा कि घुसपैठ कोई वास्तविक मुद्दा नहीं है और इससे पहले भी झारखंड व बिहार विधानसभा चुनाव के दौरान इस मुद्दे को उठाया गया था। अब बंगाल चुनाव में इस मुद्दे को उठाकर जनता को भटकाने की कोशिश की जा रही है।


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