Bihar- बिहार के 243 में 202 MLA, 40 में 30 MP, 16 में 12 राज्यसभा सांसद NDA के, अब क्या है अगला लक्ष्य?

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विवार को भारत निर्वाचन आयोग ने पश्चिम बंगाल सहित पांच राज्यों में चुनाव का एलान किया। उन राज्यों से कम सरगर्मी बिहार में नहीं थी। सोमवार को बिहार की पांच राज्यसभा सीटों पर चुनाव हुआ। चार सीटें राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन की तय थी। एक पर जिच था। वह भी माहिर मैनेजमेंट के कारण एनडीए की झोली में आ गई। अब एनडीए के बैनर तले भारतीय जनता पार्टी बिहार में नया अध्याय लिखने की तैयारी में है। इतिहास बदलने की तैयारी चल रही है। संभव है कि इस अक्षय तृतीया पर वह नया अध्याय शुरू हो। अभी खरमास चल रहा है और भाजपा इसमें नया कुछ नहीं करती है। भाजपा के नए अध्याय की शुरुआत से पहले उसकी ताकत भी समझनी चाहिए।

 

एनडीए के लिए बिहार एक मजबूत राज्य
राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन ने लोकसभा चुनाव 2024 में बिहार की 40 में से 30 सीटें जीत ली थीं। इसके बाद, बिहार विधानसभा चुनाव 2025 में एनडीए ने राज्य की 243 सीटों में से 202 अपने नाम कर लिया। अब 16 मार्च 2026 को जब राज्यसभा की पांच सीटों पर चुनाव हुआ तो सभी पर जीत हो गई। इस जीत के बाद बिहार से राज्यसभा की 16 सीटों में से 12 एनडीए के पास हैं।

भाजपा हर जगह सहयोगी दलों का ‘बड़ा भाई’
बिहार में 2020 के विधानसभा चुनाव तक एनडीए के अंदर ‘बड़ा भाई-छोटा भाई’ की बात होती थी। बिहार में निश्चित तौर पर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की पार्टी- जदयू को बड़ा भाई का मुकाम हासिल था। लेकिन, 2020 के चुनाव ने सबकुछ बदल डाला। चिराग पासवान की बगावत ने जदयू को एक बार जो छोटा किया तो फिर वापसी नहीं हो सकी। अब ‘बड़ा भाई-छोटा भाई’ वाला सवाल भी नहीं आता। लोकसभा चुनाव 2024 में भले ही जदयू-भाजपा को 12-12 सीटें मिलीं और बराबरी की बात हुई, लेकिन बिहार विधानसभा चुनाव 2025 में भाजपा ने जदयू को पीछे छोड़ दिया। भाजपा के 89 और जदयू के 85 विधायक बने। अब राज्यसभा में बिहार का प्रतिनिधित्व देखें तो भाजपा के सात और जदयू के चार सांसद हैं।

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विधान परिषद् का इस साल दो चुनाव, उसमें भी आगे
जहां तक विधान परिषद् का सवाल है तो वहां भी जदयू के 20 के मुकाबले 22 सीटों के साथ भाजपा आगे है।  विधान परिषद् का हिसाब बदलने वाला है, इसलिए फिलहाल इस गणित को छोड़ देते हैं। विधान परिषद की 17 सीटों पर इसी साल चुनाव होंगे। नौ सीटों का कार्यकाल तो जून 2026 में खत्म होने से पहले मई में चुनाव होंगे। इनमें से जदयू के पास तीन, राजद के पास दो, कांग्रेस और भाजपा की एक-एक सीट है। दो पहले से खाली हैं। नवंबर में खाली होने वाली आठ सीटों में दो भाजपा की हैं। एक-एक सीपीआई-कांग्रेस-जदयू की और दो निर्दलीय हैं। इनमें चार सीटें स्नातक और चार शिक्षक कोटे की हैं।

बिहार में पहली बार अपना मुख्यमंत्री- यही लक्ष्य
बिहार में भाजपा अब अपना मुख्यमंत्री लाने की तैयारी में है। इसी तैयारी के तहत मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को राज्यसभा के लिए राजी कराया गया है। वह दिल्ली चले जाएंगे और बिहार में भाजपा का पहली बार सीएम चेहरा होगा। चेहरा कौन होगा, इसपर तब तक संशय बना रहेगा- जब तक कि नीतीश कुमार मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा नहीं दे दें। मौजूदा उप मुख्यमंत्रियों में सम्राट चौधरी का नाम आगे चल रहा है। बाकी करीब 10 नाम और चल रहे हैं। यह तय है कि अगड़ी जाति से सीएम देने की तैयारी नहीं है। इसलिए, बाकी जातियों के नेता इंतजार में ज्यादा हैं। अगर भाजपा सीएम देने में सफल रहती है तो यह बिहार में पहला मौका होगा।

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