देश में साल 2014 क यूं तो बहुत प्रदर्शन हुए हैं। फिर चाहे वो एनआरसी-सीएए के लिए हो या फिर एसआईआईआर के लिए। लेकिन पहली बार ऐसा हुआ है कि भाजपा सरकार ने विरोध प्रदर्शन और आंदोलन को देखकर कोई फैसला लिया हो। कॉकरोच जनता पार्टी और छात्रों के आंदोलन पर सरकार इस बार बैकफुट पर दिखी। भले ही आंदोलन लंबा खिचा हो। लेकिन आखिर में इस आंदोलन को जीत ही मिली। अंतत: धर्मेंद्र प्रधान को इस्तीफा देना ही पड़ा। अब इसी जीत यानी प्रधान के इस्तीफे के बाद अभिजीत दीपके ने एक वीडियो जारी किया है।
इसमें उन्होंने कहा कि आंदोलन की बड़ी सफलता के बावजूद यह अंत नहीं, बल्कि सिर्फ शुरुआत है। दीपके ने समर्थकों, छात्रों और आलोचकों का आभार जताते हुए कहा कि सीजेपी को अभी लंबा सफर तय करना है। उन्होंने कहा कि पिछले 37 दिन बेहद कठिन रहे, लेकिन लोगों के सहयोग से यह अभियान अपने लक्ष्य तक पहुंचा।
37 दिनों के आंदोलन को लेकर अभिजीत दीपके ने क्या कहा?
दीपके ने कहा कि पिछले 37 दिन वाकई बहुत मुश्किल रहे। उन्होंने बताया कि बीमारी के बावजूद वह आंदोलन से जुड़े रहे। उन्होंने कहा कि उन्हें टाइफाइड था और बुखार भी था, इसलिए वह जंतर-मंतर पर मौजूद सभी लोगों से व्यक्तिगत रूप से धन्यवाद नहीं कह सके। उन्होंने वीडियो में कहा, “जो लोग 37 दिनों तक जंतर-मंतर पर डटे रहे, मैं उन सभी का दिल से धन्यवाद करता हूं। आपने इस देश के लिए जो किया, उसकी मैं वास्तव में सराहना करता हूं।”
आगे की लड़ाई को लेकर क्या बोले दीपके?
- दीपके ने कहा कि धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा और सरकार की ओर से मांगें मान लेना एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है, लेकिन इसे अंतिम मंजिल नहीं माना जाना चाहिए। उन्होंने कहा, “यह सिर्फ शुरुआत है। सीजेपी को अभी बहुत लंबा सफर तय करना है।” उनके अनुसार, आंदोलन ने देश के युवाओं को एक मंच पर लाने का काम किया है और आगे भी पार्टी इसी दिशा में काम जारी रखेगी।
- सीजेपी की शुरुआत मई महीने में एक व्यंग्यात्मक पहल के रूप में हुई थी, लेकिन अगले कुछ सप्ताह में यह युवाओं के आंदोलन में बदल गई। बड़ी संख्या में समर्थक, जो खुद को ‘कॉकरोच’ कह रहे थे, जंतर-मंतर पहुंचे और नीट पेपर लीक मामले में कार्रवाई की मांग करते रहे।
- आंदोलनकारियों ने धर्मेंद्र प्रधान को इस मामले के लिए जिम्मेदार ठहराते हुए उनके इस्तीफे की मांग की थी। शनिवार को उनके इस्तीफे के बाद सरकार ने प्रदर्शनकारियों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं करने का आश्वासन दिया, जिसके बाद सीजेपी ने अपना आंदोलन समाप्त करने का फैसला किया।
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- दीपके ने अपने संदेश के अंत में कहा कि आंदोलन की सफलता केवल उनकी नहीं, बल्कि उन सभी युवाओं की है जिन्होंने लगातार साथ दिया। उन्होंने दोहराया कि यह उपलब्धि आगे की जिम्मेदारियों को और बढ़ाती है। उनके अनुसार, सीजेपी का सफर अभी लंबा है और आने वाले समय में भी संगठन अपने उद्देश्यों को लेकर काम करता रहेगा।
आलोचकों को लेकर क्या संदेश दिया?
अभिजीत दीपके ने कहा कि सीजेपी को जिस तरह लोगों का समर्थन मिला, उसने आंदोलन को मजबूत बनाया। उन्होंने उन लोगों का भी धन्यवाद किया जिन्होंने उनकी आलोचना की। दीपके ने कहा कि आलोचना में कई ऐसे सवाल थे, जो सही थे और जिनसे उन्हें अपनी कमियों को समझने तथा खुद को बेहतर बनाने का मौका मिला। उन्होंने कहा, “मुझे लगता है कि इसी वजह से हम अपने वादे को पूरा कर पाए।”






