PMO का अधिकारी बन उठाता था लाभ, CBI ने दर्ज किया केस, दिल्ली के राजेंद्र नगर का रहने वाला है आरोपी

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सीबीआई ने दिल्ली के एक व्यक्ति के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है, जिस पर आरोप है कि उसने प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) का अधिकारी बनकर कई संस्थानों से फायदे लेने की कोशिश की। आरोपी की पहचान पी रामाराव के रूप में हुई है और वह दिल्ली के राजेंद्र नगर का रहने वाला है।

सीबीआई ने यह मामला पीएमओ के सहायक निदेशक की शिकायत पर दर्ज किया है। शिकायत में कहा गया कि रामाराव ने तीन अलग-अलग मौकों पर पीएमओ अधिकारी बनकर गलत तरीके से अनुरोध किए। इसके बाद सीबीआई ने उसके खिलाफ धोखाधड़ी, जालसाजी और पहचान छिपाकर धोखा देने के आरोपों में केस दर्ज किया है। अधिकारियों के मुताबिक, रामाराव ने खुद को पीएमओ का संयुक्त सचिव और उप सचिव बताकर पुणे की सिंबायोसिस इंटरनेशनल यूनिवर्सिटी के कुलपति को फोन किया और किसी व्यक्ति के एमबीए प्रोग्राम में दाखिले के लिए मदद मांगी।
इसके अलावा, उसने पीएमओ के उप सचिव के रूप में तिरुमाला तिरुपति देवस्थानम के कार्यकारी अधिकारी को 1 मई को एक फर्जी पत्र लिखा। इस पत्र में उसने 10 मई को भगवान श्री वेंकटेश्वर स्वामी के दर्शन के लिए 10 लोगों के लिए तीन एसी डबल बेड रूम की व्यवस्था करने का अनुरोध किया था। सीबीआई जांच में पता चला कि पीएमओ में पी रामाराव नाम का कोई अधिकारी कार्यरत नहीं है।

एक और मामले में सी श्रीधर नाम के व्यक्ति ने खुद को पीएमओ का संयुक्त सचिव बताते हुए मैसूरू के तहसीलदार को पत्र लिखा। इसमें सहारा प्राइम सिटी लिमिटेड की 1,023 एकड़ जमीन (कीमत लगभग 1,500 करोड़ रुपये) के रिकॉर्ड मांगे गए थे, जो प्रवर्तन निदेशालय की ओर से जब्त की गई थी। जांच में पता चला कि इस पत्र में दिया गया मोबाइल नंबर वही है, जो सिंबायोसिस यूनिवर्सिटी के मामले में इस्तेमाल हुआ था।

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