Prayagraj: पितृ विसर्जन के लिए संगम तट पर उमड़ा आस्था का जनसैलाब, नम आंखों से विदा किए पुरखे

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र्वपितृ अमावस्या यानी पितृ विसर्जन पर संगम तट पर आस्था का जनसैलाब उमड़ पड़ा। प्रदेश के कोने-कोने से पहुंचे श्रद्धालुओं ने विधि विधान से पूजन अर्चन और तर्पण करके अपने पूर्वजों को नम आंखों से विदा किया। यूपी के अलावा मध्य प्रदेश, बिहार, छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र और झारखंड आदि राज्यों से भी बड़ी संख्या में भक्त तर्पण के लिए गंगा, यमुना और सरस्वती के संगम तट पर पहुंचे। तीर्थ पुरोहितों ने तर्पण कराया। भाद्रपद पूर्णिमा से लेकर आश्विन मास की अमावस्या तक पितृ पक्ष होता है। 16 दिनों तक पूर्वजों के निमित्त श्राद्ध, तर्पण आदि कर्म किए जाते हैं।

पितृ पक्ष की अमावस्या को सर्व पितृ अमावस्या, पितृ विसर्जन अमावस्या भी कहते हैं। पूर्वजों की मृत्यु तिथि भूल जाने या पितृ पक्ष में किसी कारण वश श्राद्ध न कर पाने पर इस दिन सामूहिक रूप से उनका श्राद्ध एवं तर्पण करने के लिए कहा गया है। धार्मिक मान्यता है कि इस दिन पितरों का स्मरण कर श्राद्ध, तर्पण करने से वह प्रसन्न होकर आशीर्वाद देते हैं। मनुस्मृति और गरुड़ पुराण में कहा गया है कि यदि पितर प्रसन्न हों तो देवता भी प्रसन्न होते हैं। वहीं पितरों की नाराजगी को पितृदोष कहा जाता है जो जीवन में बाधाएं, असफलताएं और अशांति का कारण बनता है। अतः सर्वपितृ अमावस्या के दिन किए गए दान और तर्पण से पितृदोष समाप्त होता है और परिवार पर सुख-समृद्धि बनी रहती है।

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