हाईकोर्ट नैनीताल: हरिद्वार में सेना करेगी गंगा तट को जीवंत, हरिद्वार में स्टोन क्रशर शिफ्टिंग मामले में आदेश सुरक्षित

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नैनीताल हाईकोर्ट ने हरिद्वार में रायवाला से भोगपुर के बीच गंगा नदी में अवैध खनन के मामले में दायर जनहित याचिका पर सुनवाई पूरी करते हुए आदेश सुरक्षित कर दिया। सुनवाई के दौरान कोर्ट के सवाल पर सेना ने कहा कि वह खुशी से हरिद्वार में गंगा तट व किनारों प्रदुषण मुक्त व पुनः जीवंत करने में पूरा सहयोग देगी।

न्यायमूर्ति रवींद्र मैठाणी एवं न्यायमूर्ति पंकज पुरोहित की खंडपीठ के समक्ष मामले की सुनवाई हुई। मातृ सदन सहित अन्य ने हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर कर कहा था कि हरिद्वार में रायवाला से भोगपुर के बीच गंगा नदी में नियमों को ताक पर रखकर धड़ल्ले से अवैध खनन किया जा रहा है जिससे गंगा नदी के अस्तित्व को खतरा पैदा हो गया है। याचिका में कोर्ट से प्रार्थना की गई कि गंगा नदी में हो रहे अवैध खनन पर रोक लगाई जाए। याचिकाकर्ता का कहना था कि केंद्र सरकार ने गंगा नदी को बचाने के लिए एनएमसीजी बोर्ड गठित किया है। जिसका मुख्य उद्देश्य गंगा को साफ करना व उसके अस्तित्व को बचाए रखना है।

 

एनएमसीजी की ओर से राज्य सरकार को बार बार आदेश दिए गए कि यहां खनन कार्य नहीं किया जाय। उसके बाद में सरकार ने यहां खनन कार्य करवाया जा रहा है। याचिकाकर्ता ने कहा था कि नदी तल से 5 किमी के दायरे में स्टोन क्रशर बंद किए जाने थे। पूर्व में कोर्ट ने पूछा था कि कि हरिद्वार जिले के सभी 121 स्टोन क्रशर नदी से पांच किमी की दूरी पर क्यों स्थानांतरित नहीं किए जा सकते और इनकी शिफ्टिंग के लिए उपयुक्त स्थान क्यों नहीं तलाशा जा सकता। मामले में कोर्ट ने 14 फरवरी 2025 को केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से अनुरोध किया था कि वह क्षेत्र का दौरा करें और संबंधित क्षेत्र में चल रही खनन गतिविधियों के संबंध में रिपोर्ट पेश करें तस्था यह भी स्पष्ट करें कि वहां मशीनीकृत या स्वचालित मशीनों का उपयोग किया जा रहा है या नहीं जिसमें सीपीसीबी द्वारा रिपोर्ट दे दी गई थी। कोर्ट ने नदी से पांच किमी दूर क्रशर शिफ्टिंग के लिए इन्फैंट्री बटालियन गढ़वाल राइफल से भी सलाह मांगी थी।

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अब तक जगह चयनित न होने पर जताई थी नाराजगी
नैनीताल हाई कोर्ट ने पूर्व में इस बात पर कड़ी नाराजगी जताई थी कि जब कोर्ट की ओर से पूर्व में भी क्रशर्स के लिए नदी से पांच किमी दूर स्थान चिन्हित करने को कहा गया था और नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल ने भी इसके निर्देश दिए थे तब भी इस पर अमल क्यों नहीं किया गया। कोर्ट ने इसे अत्यंत गंभीर मामला बताया। कोर्ट ने यह भी कहा था कि इस वजह से पूर्व में 48 क्रशर बंद भी कर दिए गए थे तो वे दोबारा बगैर कोर्ट के निर्देश के कैसे चालू कर दिए गए।

सेना ने नदी तट के संरक्षण में भागीदारी की दी सहमति
सोमवार को सुनवाई के दौरान, 127 इन्फैंट्री बटालियन, (टीए) इको, गढ़वाल राइफल्स से कर्नल प्रफुल्ल थपलियाल ने सुनवाई में भाग लिया। उन्होंने कहा कि यह बटालियन इस मामले में अदालत की मंशा के अनुरूप गंगा नदी के तट व किनारों के आसपास के क्षेत्र को फिर से जीवंत करने में पूरा सहयोग करेगी।


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