उत्तराखंड/चमोली : सरकार नहीं ले रही प्रधान संगठनों के न्योयोचित मांगों की सुध।

Spread the love

पिछले साल से ही प्रधान लोग जिस तरह रोज रोज सड़कों पर आंदोलन के लिए बाध्य किए जा रहे हैं और सरकार के द्वारा उनकी कोई सुध खबर नहीं ली जा रही है तो अब राज्य भर में सरकार के खिलाफ प्रधान संगठनों का आंदोलन जोर पकड़ता जा रहा है। प्रधानों का धरना आज दसवें दिन भी जारी रहा।

प्रधान संगठन पंचायतों को मजबूत बनाने की दिशा में 12 सूत्रीय मांगों पर सरकार के आगे ऐड़ी रगड़ रहा है। परंतु उनकी एक नहीं सुनी जा रही है। प्रधान संगठनों का कहना है कि सरकार ने ग्राम पंचायतों को मजबूत करने के बजाए कमजोर करने का काम किया है। कहना है कि ग्राम पंचायत के तमाम विकास की निधियों में कटौती कर दूसरे संस्थानों को दिए जाने के सरकार ने फरमान जारी किए हैं जो कि बिलकुल भी ठीक नहीं है।ग्राम स्वराज की अवधारणा को इस सरकार ने मिट्टी में मिला दिया है।

प्रधानों का कहना है कि एक तरफ प्रधानों का मानदेय मात्र 1500 रुपए है और सीएससी सेंटरों को 2500 रुपए बेबजह दिए जाने का फरमान जारी किया है। जबकि प्रधान ही सब कार्य कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि इसी तरह मनरेगा में कार्य दिवस और मजदूरों की मजदूरी बढ़ाने की मांग भी की गई थी।वह भी डंडे बस्ते में डाल कर रखा है।

उनका कहना है कि पिछले साल से आज तक कोविड काल में प्रधानों ने अपनी व अपने परिवार की जान की परवाह न करते हुए सरकार के साथ कंधे से कंधा मिलाकर फ्रंटलाइन में आगे बढ़ कर काम किया है। परंतु सरकार ने उनको इसका पुरुस्कार उनके और पंचायतों के अधिकारों का काट कर चुकाया है।

और पढ़े  श्रीनगर गढ़वाल- डाक विभाग ने शुरू की दो नई सेवाएं, 35 किलो के पैकेट भी डाक से देश के किसी भी कोने में भेज सकेंगे

बताया कि सरकार ने पंचायतों में कभी मनरेगा और दूसरे विकास कार्यों में मैटेरियल के लिए ठेकेदारों को थोपा।कभी वित्त की धनराशि को जल संस्थान को लेकर जल जीवन मिशन में खर्च करने का आदेश दनदनाया तो कभी सीएससी सेंटरों को मुफ्त में मानदेय देने का बेतुका निर्देश दिए। जिससे ग्राम पंचायतें कमजोर बनती जा रही है।

इन सबके खिलाफ पिछले साल से ही प्रधान संगठन सड़कों से लेकर राजधानी मुख्यालय तक आंदोलन कर चुके हैं। परंतु सरकार का सारा ध्यान तो मुख्यमंत्रियों की अदला-बदली में ही लगा हुआ है।प्रधानों का कहना था कि अच्छा होता सरकार ब्लाकों में ज्यादा कर्मचारियों की नियुक्तियां करने की दिशा में कुछ काम करती। विकास खंड मुख्यालयों में कर्मचारियों के कोटे से पंचायतों के कार्य भी प्रभावित हो रहे हैं।समय से ग्राम पंचायतों तमाम विकास परक योजनाएं आनलाइन नहीं हो पा रहे हैं। क्योंकि कंप्यूटर आपरेटरों की भारी कमी है।एक एक ग्राम पंचायत अधिकारी और ग्राम विकास अधिकारियों के पास बीस बीस ग्राम पंचायतों में काम करना पड़ रहा है तो गांवों में विकास की गति भी धीमी हो रही है। कहा कि अगर अब भी सरकार अपने अड़ियल रुख पर कायम रही तो आने वाले विधानसभा चुनावों में सरकार का पूरा बहिष्कार किया जायेगा।


Spread the love
  • Related Posts

    हल्द्वानी अग्निकांड: पार्सल से भरा था गोदाम, शटर के पास शॉर्ट सर्किट की एक चिंगारी से जला पूरा वेयरहाउस

    Spread the love

    Spread the loveहल्द्वानी में रामपुर रोड पर जीतपुर नेगी के पास अमेजन के वेयरहाउस में लगी आग इतनी वीभत्स थी कि दो वाहन पूरी तरह जल गए जबकि बाहर खड़ीं…


    Spread the love

    उत्तराखंड हाईकोर्ट- देहरादून में वृक्ष कटाई, शिकायतकर्ताओं के सामाजिक बहिष्कार पर HC का राज्य से जवाब तलब

    Spread the love

    Spread the loveउत्तराखंड उच्च न्यायालय ने शुक्रवार को राज्य सरकार को देहरादून के एक गांव में कथित अवैध वृक्ष कटाई और उसके बाद शिकायतकर्ताओं के सामाजिक बहिष्कार से संबंधित शिकायत…


    Spread the love

    Leave a Reply

    Your email address will not be published. Required fields are marked *