Prime Minister Modi:प्रधानमंत्री का भारी हंगामे के बीच राज्यसभा में जवाब कहा – जितना कीचड़ उछालोगे, उतना ही कमल खिलेगा

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Prime Minister Modi:प्रधानमंत्री का भारी हंगामे के बीच राज्यसभा में जवाब कहा – जितना कीचड़ उछालोगे, उतना ही कमल खिलेगा

पीएम मोदी संसद के बजट सत्र के दौरान गुरुवार को राज्यसभा में राष्ट्रपति के अभिभाषण के धन्यवाद प्रस्ताव का जवाब दे रहे हैं।
इस सदन में जो भी बात होती है, उस बात को देश बहुत ही गंभीरता से सुनता है। लेकिन ये दुर्भाग्यपूर्ण है कि इस समय सदन में कुछ लोगों का व्यवहार और वाणी न सिर्फ सदन बल्कि देश को निराश करने वाली है। इस प्रकार की प्रवृत्ति के माननीय सदस्यों को मैं यही कहूंगा कि कीचड़ उसके पास था मेरे पास गुलाल, जो भी जिसके पास था उसने दिया उछाल।

प्रधानमंत्री ने कहा, इस देश के किसानों के साथ क्या बीती है। ऊपर के एक वर्ग को संभाल लेना और वहीं से राजनीति चलाना, यही सिलसिला चला। देश में छोटे किसान उपेक्षित थे, उनकी आवाज काई सुनने वाला नहीं था। हमारी सरकार ने उन पर ध्यान दिया। आज साल में तीन बार सम्मान निधि सीधे छोटे किसानों के खातों में जमा होती है।

प्रधानमंत्री ने कहा, हमने सैचुरेशन का रास्ता चुना अर्थात शत प्रतिशत लाभार्थी को लाभ पहुंचे। सरकार इस राह पर काम कर रही है। सैचुरेशन का मतलब होता भेदभाव की सारी गुंजाइश खत्म करना। यह तुष्टीकरण की आशंकाओं को खत्म कर देता है।

प्रधानमंत्री ने कहा, देश की आजादी में आदिवासी भाईयों का बहुत योगदान है, लेकिन दशकों तक वे विकास से दूर रहे। उनके नौजवानों के मन में बार-बार सरकार के खिलाफ सवाल उठते चले गए। सरकार ने उनके हित में काम किया होता, तो आज मुझे इतनी मेहनत नहीं करनी पड़ती। अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार में पहली बार आदिवासियों के लिए अगल मंत्रालय बना।

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प्रधानमंत्री ने राज्यसभा में कहा, हम देश को विकास का मॉडल दे रहे हैं। देश हमारे साथ है। कांग्रेस को बार-बार देश नकार रहा है, लेकिन कांग्रेस के साथी साजिशों से बाज नहीं आते हैं। जनता उनको देख रही है और सजा दे रही है।

प्रधानमंत्री ने कहा, हम ऐसी कार्य संस्कृति को लेकर आ रहे हैं, जो मेरा-तेरा को मिटाने वाला रास्ता है। उन्होंने कहा, हम मक्खन पर लकीर पर खींचने वाले लोग नहीं हैं, हम पत्थर पर लकीन खींचने वाले लोग हैं।

प्रधानमंत्री ने कहा, देश आजाद हुआ, तब से 2014 तक 14 करोड़ एलपीजी कनेक्शन थे। लोग सांसदों के पास जाते थे कि हमें कनेक्शन मिल जाए। उस समय डिमांड भी कम थी, गैस लाने के लिए खर्चा भी नहीं करना पड़ता था। हमने तय किया कि हम घर को एलपीजी कनेक्शन देंगे। हमें मालूम था, हमें मेहनत करनी पड़ेगी, दुनिया भर से गैस लाने पड़ेगी, लेकिन हमारी प्राथमिकता देश का सामान्य नागरिक था। इसलिए हमने 32 करोड़ से ज्यादा लोगों के पास गैस कनेक्शन पहुंचाए। इस एक उदाहरण से आप समझ सकते हैं कि हमें कितनी मेहनत करनी पड़ी होगी।

प्रधानमंत्री ने कहा, कोई भी सरकार में आता है, तो देश के लिए कुछ करने का वादा करके आता है, लेकिन सिर्फ भावनाएं व्यक्त करने से बात नहीं बनती है। इसलिए विकास की गति, नियत, परिणाम क्या है, यह बहुत मायने रखता था। सिर्फ आप कहते रहें कि हम भी कुछ करते थे, इतने से बात बनती नहीं है।

प्रधानमंत्री ने कहा, पहले देश में परियोजनाओं को अटकाना, लटकाना आदत बन गई थी। हमने टेक्नोलॉजी का प्लेटफॉर्म तैयार किया, पीएम गतिशक्ति मास्टर प्लान लेकर आए और देश के इंफ्रास्ट्रक्चर को गति देने का काम हो रहा है। जो योजनाएं बनाने में महीनों लग जाते थे, वे सप्ताहों के भीरत आगे बढ़ा दिया जाता है। क्योंकि आधुनिक भारत के लिए इंफ्रास्ट्रक्चर का महत्व हम समझते हैं।

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प्रधानमंत्री ने कहा, कलबुर्गी में आठ लाख से ज्यादा जनधन के खाते खुले हैं। इतने काम के बाद अगर किसी का खाता बंद हो जाए तो उनकी पीड़ा मैं समझ सकता हूं। कभी कभी यहां तक कही देते हैं कि गरीब को हरा दिया। अरे भाई जनता जनार्दन ने किसी और को जिता दिया और आप यहां रो रहे हो। जनधन आधार मोबाइल की त्रिशक्ति और डीबीटी के तहत पिछले कुछ वर्षों को 27 लाख करोड़ रुपया देश की जनता के खातों में हितधारकों के ट्रांसफर किया गया।

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, हमनें बैंकिंग व्यवस्था का स्थाई समाधान निकाला और जनधन अभियान चलाया। पिछले नौ साल में ही 48 करोड़ जनधन खाते खोले गए। 32 करोड़ बैंक खाते ग्रामीण और कस्बों में हुए हैं। यानी देश के गांव तक प्रगति की मिसाल को ले जाने का प्रयास हुआ है। उन्होंने कहा, खरगे जी शिकायत कर रहे थे, मोदी जी बार-बार मेरे चुनावी क्षेत्र में आते हैं।


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