राम मंदिर निर्माण की भविष्य योजना की रुपरेखा तय करने के लिए मंदिर निर्माण समिति की दो दिवसीय बैठक 15 अक्तूबर से अयोध्या में होगी।

राम मंदिर निर्माण की भविष्य योजना की रुपरेखा तय करने के लिए मंदिर निर्माण समिति की दो दिवसीय बैठक 15 अक्तूबर से अयोध्या में होगी।

इस बैठक के लिए मंदिर निर्माण समिति चेयरमैन व सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी नृपेन्द्र मिश्र 14 अक्तूबर की सायं यहां पहुंचेंगे

राम मंदिर के निर्माण की प्रगति की समीक्षा और भविष्य योजना की रुपरेखा तय करने के लिए मंदिर निर्माण समिति की दो दिवसीय बैठक 15 अक्तूबर से अयोध्या में होगी। फिलहाल निर्माण कार्य जारी है।
<strong>राम मंदिर निर्माण की भविष्य योजना की रुपरेखा तय करने के लिए मंदिर निर्माण समिति की दो दिवसीय बैठक 15 अक्तूबर से अयोध्या में होगी।</strong>
राम मंदिर निर्माण की प्रगति की समीक्षा और भविष्य योजना की रुपरेखा तय करने के लिए मंदिर निर्माण समिति की दो दिवसीय बैठक 15 अक्तूबर से अयोध्या में होगी।
इस बैठक के लिए मंदिर निर्माण समिति चेयरमैन व सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी नृपेन्द्र मिश्र 14 अक्तूबर की सायं यहां पहुंचेंगे। उधर कारसेवकपुरम में मंगलवार को आयोजित पत्रकार वार्ता में श्रीरामजन्म भूमि तीर्थ क्षेत्र के महासचिव चंपत राय ने बताया कि प्लिंथ लेवल के बाद बंशीपहाड़पुर के लाल बलुआ नक्काशीदार पत्थरों के सात लेयर रखे जा चुके हैं जिसके कारण सतह मंदिर की ऊंचाई करीब 30 फिट हो गई है। उन्होंने बताया कि लोअर प्लिंथ की डेढ़ मीटर मोटी एक लेयर पूरे परिधि में तैयार हो गयी है जो कि दर्शनार्थियों के लिए परिक्रमा पथ के रुप में प्रयोग किया जा सकेगा।<strong>राम मंदिर निर्माण की भविष्य योजना की रुपरेखा तय करने के लिए मंदिर निर्माण समिति की दो दिवसीय बैठक 15 अक्तूबर से अयोध्या में होगी।</strong>
ट्रस्ट महासचिव के मुताबिक राम मंदिर के गर्भगृह में मकराना के श्वेत मार्बल के स्तम्भ लगाने की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। उन्होंने बताया कि राम मंदिर में 392 स्तम्भ लगाए जाने हैं। इन सभी स्तम्भों को लगाए जाने के बाद इन पर 16-16 मूर्तियां उत्कीर्ण की जाएंगी। उन्होंने बताया कि प्रत्येक खंभे की ऊंचाई 19 फिट 11 इंच है। यह भी जानकारी दी कि मंदिर में गर्भगृह के साथ गुण मंडप, रंग मंडप व नृत्य मंडप व सिंहद्वार के रुप में अलग-अलग भाग हैं, जिसकी पूरी लंबाई 380 फिट है। उन्होंने बताया कि निर्माण कार्य सभी भागों में एक साथ हो रहा है। इसका मुख्य कारण गर्भगृह से लेकर प्रवेशद्वार तक का लेवल एक रखना है। उन्होंने बताया कि पत्थरों के काम में सेटिंग के दौरान एक इंच का भी अंतर हुआ तो कठिनाई पैदा हो जाएगी।
दूरदर्शन के टाइम लैप्स कैमरों से ली जा रही हैं निर्माण की तस्वीरें
श्रीरामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र के महासचिव का कहना है

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