रामनगरी अयोध्या आज दसवें दीपोत्सव पर एक बार फिर विश्व कीर्तिमान बनाने जा रही है। राम की पैड़ी सहित सरयू तट के 56 घाटों पर 30 लाख से अधिक दीये सजाए जा चुके हैं। अवध विश्वविद्यालय के 35 हजार स्वयंसेवकों ने तीन दिन की मेहनत के बाद शुक्रवार को दीप सज्जा का काम पूरा कर लिया।
दीपों की सजावट देखने पहुंच रहे देशी-विदेशी पर्यटक
राम की पैड़ी और आसपास के घाटों पर दीयों से बनाई गई कलात्मक आकृतियां पर्यटकों को आकर्षित कर रही हैं। दीपों की कतारों के साथ रंगोली के अलग-अलग पैटर्न भी लोगों का ध्यान खींच रहे हैं। देशी-विदेशी पर्यटक इन सजावटों को देखने पहुंच रहे हैं। अर्जेंटीना से आई कैरोलिना ने बताया कि उन्होंने पहली बार ऐसा दृश्य देखा है। उन्हें यहां का माहौल बहुत अच्छा लग रहा है।
जगद्गुरु रामदिनेशाचार्य का कहना है कि दीपोत्सव में अयोध्या अपने गौरवशाली प्रसंग को आंखों के सामने दोहराने जा रही है। महंत गिरीश दास के मुताबिक, चौबीसों घंटे रामधुन और कीर्तन से गूंजती रामनगरी का वातावरण त्रेतायुग को सजीव कर रहा है। महंत विवेक आचारी भी रामचरितमानस की चौपाई ‘पुनि देख अवधपुरी अति पावनि, त्रिबिध ताप भव रोग नसावनि…’ के आध्यात्मिक महत्व को रेखांकित करते हैं। उनके मुताबिक, इस पुण्यभूमि के दर्शन के लिए देश-दुनिया से श्रद्धालु पहुंच रहे हैं।
वीवीआईपी के लिए 80 गोल्फकार्ट और 20 एसी बसें
दीपोत्सव में सात नवंबर को वीवीआईपी मेहमानों को एयरपोर्ट, होटल और शहर के अन्य निर्धारित स्थानों से आयोजन स्थल तक पहुंचाने के लिए 80 गोल्फकार्ट की व्यवस्था की गई है। इसके अलावा 10 ट्रैवलर और रोडवेज की 20 एसी बसें भी लगाई गई हैं। एआरटीओ गुलाब चंद्र के मुताबिक, अतिथियों के आने का सिलसिला एयरपोर्ट से शुरू होगा। वहां से उन्हें निर्धारित होटलों और अन्य स्थानों तक पहुंचाया जाएगा। राम की पैड़ी और रामकथा पार्क में होने वाले कार्यक्रमों के लिए भी वाहनों की उपलब्धता रहेगी।
दीप प्रज्ज्वलन के दौरान स्वयंसेवकों को सूती कपड़े पहनने, सिंथेटिक और ढीले वस्त्रों से बचने तथा लंबे बाल बांधकर रखने की सलाह दी गई है। तेल डालते समय दीयों के आसपास तेल न फैलाने और जलते दीपों के पास ज्वलनशील सामग्री न रखने को कहा गया है। भीड़ में धक्का-मुक्की से बचने और निर्धारित रास्तों से आवागमन करने के निर्देश भी दिए गए हैं।






