मसूरी: 12 साल बाद शरदोत्सव का आगाज, 40 टीमों ने दिखाई लोक संस्कृति की झलक, पांडवाज ने शाम को बनाया यादगार

पहाड़ों की रानी मसूरी में मंगलवार को 12 साल बाद शरदोत्सव का रंगारंग आगाज हुआ। सर्वे ग्राउंड से गांधी चौक तक भव्य सांस्कृतिक शोभायात्रा निकाली गई। इसमें उत्तराखंड की लोक संस्कृति के साथ देश के विभिन्न राज्यों की सांस्कृतिक विविधता देखने को मिली। बारिश भी कलाकारों और दर्शकों का उत्साह कम नहीं कर सकी।

शोभायात्रा का शुभारंभ सर्वे ग्राउंड से नगर पालिका अध्यक्ष मीरा सकलानी ने किया। उत्तराखंड के विभिन्न क्षेत्रों और देश के अलग-अलग राज्यों से आईं करीब 40 सांस्कृतिक टीमों ने इसमें भाग लिया। शोभायात्रा लंढौर, माल रोड होते हुए गांधी चौक पहुंची। पारंपरिक वेशभूषा में सजे कलाकारों ने अपनी प्रस्तुतियों से लोगों का ध्यान खींचा।
शहर के प्रमुख चौक-चौराहों पर सांस्कृतिक दलों ने लोकगीतों और पारंपरिक लोकनृत्यों से लोगों को आकर्षित किया। भगत सिंह चौक पर पालिका अध्यक्ष मीरा सकलानी ने सांस्कृतिक टीमों के साथ तांदी नृत्य किया। जिलाधिकारी आशीष चौहान और नगर पालिका अध्यक्ष मीरा सकलानी ने लाइब्रेरी चौक पर शरदोत्सव का शुभारंभ किया। उन्होंने गुब्बारे उड़ाए और आतिशबाजी भी की। विभिन्न स्कूलों की छात्राओं ने भी शोभायात्रा में उत्साहपूर्वक भाग लिया।
पांच दिन चलेगा शरदोत्सव
नगर पालिका अध्यक्ष मीरा सकलानी ने बताया कि शरदोत्सव छह अक्तूबर से 10 अक्तूबर तक आयोजित किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि यह आयोजन उत्तराखंड की लोक संस्कृति, कला, संगीत और परंपराओं को देश-दुनिया तक पहुंचाने का महत्वपूर्ण मंच है। इसके माध्यम से स्थानीय कलाकारों को अपनी प्रतिभा दिखाने का अवसर मिलेगा। मसूरी आने वाले पर्यटकों को उत्तराखंड की समृद्ध लोक संस्कृति को करीब से जानने का मौका मिलेगा।
स्थानीय कलाकारों को मिलेगा मंच
नगर पालिका अधिशासी अधिकारी गौरव भसीन ने बताया कि आयोजन में 50 से अधिक स्थानीय कलाकारों को अपनी प्रतिभा प्रस्तुत करने का अवसर दिया जा रहा है। उत्तराखंड के विभिन्न क्षेत्रों की सांस्कृतिक टीमें भी इसमें भाग ले रही हैं। अन्य राज्यों से आई सांस्कृतिक टीमें भी अपनी प्रस्तुतियां देंगी। इससे मसूरी में अलग-अलग क्षेत्रों की संस्कृति और परंपराओं को एक मंच पर देखने का अवसर मिलेगा।
सांस्कृतिक विविधता की दिखी झलक
शोभायात्रा में उत्तराखंड की समृद्ध लोक परंपराओं के साथ देश के विभिन्न राज्यों की संस्कृति की झलक देखने को मिली। करीब 40 सांस्कृतिक टीमों ने अपनी प्रस्तुतियों से राष्ट्रीय सांस्कृतिक मिलन का रूप दिया। इनमें जय बद्री विशाल समिति, छौलिया नृत्य दल, हरियाणवी नृत्य दल और जौनसारी जनजाति कला समूह जैसे कई दल शामिल थे। शहर की सड़कों पर लोकगीतों, पारंपरिक नृत्यों और वाद्य यंत्रों की गूंज से माहौल पूरी तरह सांस्कृतिक रंग में रंग गया। पूरे मार्ग पर स्थानीय लोगों और पर्यटकों की भीड़ सांस्कृतिक प्रस्तुतियां देखने के लिए जगह-जगह रुकी रही।
पांडवाज की प्रस्तुतियों ने शरदोत्सव की शाम को बनाया यादगार
शरदोत्सव के तहत टाउन हॉल में आयोजित सांस्कृतिक संध्या उत्तराखंड की लोकसंस्कृति और संगीत की अनूठी छटा से सराबोर रही। पद्मश्री बसंती बिष्ट के जागरों और पांडवाज टीम की शानदार प्रस्तुतियों ने दर्शकों को देर रात तक बांधे रखा।

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स्टार नाइट कार्यक्रम का आगाज पद्मश्री बसंती बिष्ट और उनकी टीम की जागर प्रस्तुति से हुआ। बसंती बिष्ट ने अपनी विशिष्ट शैली में देव जागरों की प्रस्तुति देकर उत्तराखंड की प्राचीन लोकपरंपरा को मंच पर जीवंत किया। उनके जागरों में देवी-देवताओं के आह्वान, पहाड़ की आस्था और लोकविश्वास की गहरी झलक मिली। इसके बाद पांडवाज टीम ने अपनी प्रस्तुतियों से सांस्कृतिक संध्या में रंग भर दिया। टीम ने उत्तराखंड की लोकपरंपराओं, देवी-देवताओं और पहाड़ी जीवन से जुड़े कई गीतों की प्रस्तुति दी। कलाकारों की ऊर्जा और बेहतरीन तालमेल ने दर्शकों को देर तक बांधे रखा।

पांडवाज टीम में ईशान, श्रेष्ठ, शिवानी भागवत, सुशान्त, गौरव, अनिरुद्ध, राकेश, अंशुल, सृष्टि, शिवानी, सिद्धार्थ, आदित्य, कुणाल, सलिल, ऋषि, श्रेय, विमल, उदित और बण्टी जैसे कलाकार शामिल थे। इन सदस्यों ने अपनी सामूहिक प्रस्तुतियों से दर्शकों का मन मोह लिया। उन्होंने उत्तराखंड की लोक विरासत और संगीत की समृद्ध परंपरा को मंच पर जीवंत किया। टीम के बेहतरीन तालमेल और ऊर्जा ने सांस्कृतिक संध्या को विशेष बना दिया।

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