अब किसानों को इन खादों का इस्तेमाल करना पड़ेगा। किसानों की चिंता यह है कि क्या यह दोनों विकल्प 12-32-16 खाद की तरह असरदार होंगे या नहीं। किसान 12-32-16 खाद के जगह-जगह सोसायटियों में संपर्क कर रहे हैं या वहां के चक्कर काट रहे हैं, लेकिन हर जगह से उन्हें यही जवाब मिल रही है कि खाद उपलब्ध नहीं है। कृषि विभाग के अनुसार हिमाचल में गेहूं का क्षेत्रफल 3.24 लाख हेक्टेयर के करीब है। वहीं, जिला कांगड़ा में करीब 90,000 हेक्टेयर भूमि पर गेहूं की पैदावार की जाती है।
जिला कांगड़ा में हर साल गेहूं की बुबाई के लिए करीब दो हजार मिट्रिक टन खाद की डिमांड रहती है। अब किसानों को सोसायटियों और अन्य केंद्रों में केवल डीएपी और 16:16 खाद की मिल सकेगी।
केंद्र की ओर से 12-32-16 खाद की आपूर्ति पर पूरी तरह से रोक लगा दी गई है। इसके विकल्प में डीएपी और 16:16 खाद किसानों को दी जाएगी। डीएपी खाद की कीमत 1,350 रुपये प्रति बोरी और 16:16 खाद की कीमत 2,250 रुपये प्रति बोरी है। इस दोनों खाद की सप्लाई आ रही है और डिमांड के हिसाब के सोसायटियों में पहुंचाई जा रही है। –प्रदीप शर्मा, प्रबंधक हिमफेड, कांगड़ा








