ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची ने पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष को खत्म करने के लिए सात दिन की योजना पेश करने की बात कही है। न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, इस योजना के तहत होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलने और उसके बाद ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर व्यापक बातचीत शुरू करने का प्रस्ताव है।
इससे पहले जर्मनी के विदेश मंत्री योहान वाडेफुल के साथ बैठक में अराघची ने कहा कि ईरान ने कूटनीति को आगे बढ़ाने के लिए अपनी उचित शर्तें और मांगें अमेरिकी पक्ष के सामने रख दी हैं। उन्होंने कहा कि क्षेत्र में सुरक्षा बहाल करने के लिए ईरान के खिलाफ अमेरिका की हस्तक्षेपकारी और आक्रामक कार्रवाइयों को खत्म करना जरूरी है।
ईरान-अमेरिका के बीच समझौता न होने के लिए कौन जिम्मेदार?
इस बीच, फॉक्स न्यूज को दिए एक साक्षात्कार में ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान ने इसी साल जून में अमेरिका और ईरान के बीच हुए समझौते को लागू नहीं किए जाने के लिए अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और अमेरिकी पक्ष को जिम्मेदार ठहराया।
पेजेश्कियान ने कहा, “हम आपके राष्ट्रपति के साथ एक समझौते पर पहुंचे थे। उस समझौते पर हस्ताक्षर हुए थे और उसके आधार पर हम आगे बढ़ने के लिए तैयार थे और अब भी तैयार हैं। ढांचा तय हो चुका था। हमने होर्मुज जलडमरूमध्य को बंद नहीं किया था। वह खुला था, बिना किसी कानूनी औचित्य के उन्होंने हम पर हमला किया। उन्होंने हमारे सम्मानित सर्वोच्च नेता की हत्या की और उन्हें शहीद कर दिया। हमारे वैज्ञानिकों, सैन्य कमांडरों और सरकार के लोगों की भी हत्या की गई। समस्या यह है कि अमेरिका बातचीत करने के बजाय पहले हम पर बमबारी करके और हर रास्ता बंद करके संघर्ष में उतर गया। हम तैयार हैं।”
पेजेश्कियान बोले- नहीं झुकेगा अमेरिका
ईरान के राष्ट्रपति ने संयुक्त राष्ट्र महासभा में दिए अपने भाषण के दौरान रखे रुख को दोहराते हुए कहा कि संघर्ष शुरू करने की जिम्मेदारी अमेरिका की थी और ईरान केवल अपना बचाव कर रहा था। पेजेश्कियान ने कहा कि ईरान पर लगाए गए प्रतिबंधों के बावजूद उनका देश किसी विदेशी शक्ति के सामने झुकने वाला नहीं है। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय कानूनी ढांचे के तहत समझौते के लिए अमेरिकी प्रशासन पर फैसला लेने की जिम्मेदारी डाली।





