जीबी पंत कृषि विवि पंतनगर के मधुमक्खी अनुसंधान केंद्र में वैज्ञानिक मधुमक्खियों को बचाने के लिए नित नए समाधान ढूंढ़ रहे हैं। हाल ही में वैज्ञानिकों ने मधुमक्खियों को ततैयों से बचाने के लिए वैस्प गार्ड नामक यंत्र विकसित किया है। जो मौन पालकों की सबसे बड़ी समस्या का हल बन सकता हैं। विवि की ओर से इस नवाचार का पेटेंट फाइल कर दिया गया है।
मधुमक्खियों पर ऐसे हमला करते हैं ततैये
कीट विज्ञान के विभागाध्यक्ष डॉ. पीके मल्ल ने बताया कि मौन पालन के क्षेत्र में ततैया मधुमक्खी का सबसे बड़ा दुश्मन है। प्रमुखतः पाए जाने वाला ततैये (वैस्पा मैग्नेफिका) मौन बाॅक्स के द्वार पर उड़ते रहते हैं और मधुमक्खी को पकड़कर दो या तीन भागों में काट देते हैं। वक्ष का भाग चबाकर यह अपने पेट में लेते हैं और अपने बच्चों को खिलाते हैं। बताया कि एक बाॅक्स पर मौजूद तीन-चार ततैये ही पूरी कालोनी को नष्ट कर सकते हैं। बेहद समझदार होने के कारण यह किसी प्रपंच में भी नहीं फंसते हैं।
ऐसे ईजाद हुआ वैक्स गार्ड
जब बर्र के हमले लगातार बढ़ने लगे, तब कीट विज्ञान के विभागाध्यक्ष डॉ. मल्ल ने इस समस्या पर गंभीरता से काम शुरू किया। उन्होंने बर्र के व्यवहार, उसके हमले के तरीकों और उससे मधुमक्खियों पर होने वाले असर का अध्ययन किया। फिर मैकेनिकल इंजीनियरिंग विभाग के डॉ. वीके सिंह, डाॅ. जलज शर्मा और उनकी टीम को भी इस काम से जोड़ा। कई प्रयोग और डिजाइनों पर काम करने के बाद वैस्प गार्ड तैयार हुआ। यह एक सस्ती (मात्र 150-200 रुपये) तकनीक है, जो मधुमक्खियों को बर्र के हमलों से बचाने में मदद करती है। इसे मौन पालकों की जरूरत को ध्यान में रखकर डिजाइन किया गया है।
ऐसे काम करता है वैक्स गार्ड
डाॅ. मल्ल ने बताया कि लकड़ी का फ्रेम बनाकर उसमें निश्चित दूरी (लगभग एक इंच) पर महीन तारों का जाल बनाया गया है। इन तारों में एक विशेष सर्किट के जरिए उपयुक्त वोल्ट का करंट प्रवाहित किया गया है। इन तारों के बीच से मधुमक्खी तो निकल जाती है, परंतु बर्र को दो तारों के बीच संपर्क में आते ही तेज झटका लगता है। जिससे वह, या तो मर जाते हैं, या बहुत दूर भाग जाते हैं। इस वैस्प गार्ड को मौन बाॅक्स के मुख्य द्वार पर लगा दिया जाता है। चूंकि बर्र समझदार जीव है, इसलिए एक बार करंट लगने के बाद वह तारों में करंट नहीं भी होने के बावजूद मौन बाॅक्स के पास नहीं जाती है।








