कुमाऊं की यातायात व्यवस्था को सुगम बनाने वाली महत्वपूर्ण काठगोदाम-हल्द्वानी-लालकुआं बाईपास परियोजना के लिए आगामी छह माह में टेंडर जारी कर दिए जाएंगे। इन्हीं छह माह में वन विभाग से भूमि हस्तांतरण और डीपीआर बनाने की प्रक्रिया भी पूरा होगी। किया जाएगा। केंद्र की अलाइंमेंट अप्रूवल कमेटी (एएसी) की तरफ से परियोजना को हरी झंडी मिलने के बाद एनएचएआई ने आगे की प्रक्रिया शुरू कर दी है।
वर्ष 2022 में हुआ था बड़ा एलान
चार जनवरी 2022 को केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने काठगोदाम-हल्द्वानी-लालकुआं बाईपास की घोषणा की थी। परियोजना की अनुमानित लागत करीब 2300 करोड़ रुपये बताई गई। इसके बाद मार्च 2022 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी उत्तराखंड के रुद्रपुर में अपने संबोधन में इसे घोषणा को शामिल किया। वर्ष 2024 के अंत और 2025 की शुरुआत में मुख्यमंत्री स्तर से केंद्र को भेजे गए प्रस्तावों में लालकुआं, हल्द्वानी और काठगोदाम बाईपास को शामिल किया गया। करीब साढ़े तीन साल बाद अगस्त 2025 में परियोजना को लेकर फिर हलचल हुई। सांसद अजय भट्ट के नेतृत्व में प्रतिनिधिमंडल ने केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी से मुलाकात की और एक बार फिर लोगों के मन में उम्मीद जगी।
जाम से मिलेगी राहत
काठगोदाम-लालकुआं बाईपास बनने से भारी और लंबी दूरी के वाहनों को शहर के भीतर आने की जरूरत कम होगी। इसका सीधा फायदा हल्द्वानी के प्रमुख व्यस्त मार्गों को मिल सकता है। शहर के अंदर ट्रकों, बसों और दूसरे बाहरी वाहनों की संख्या घटने से जाम की स्थिति में सुधार होगा। बाईपास से काठगोदाम और लालकुआं के बीच सफर करने वाले वाहन चालकों को वैकल्पिक और सुगम मार्ग मिलेगा।
काठगोदाम-लालकुआं बाईपास को मंजूरी मिलने के बाद आगे की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। वन विभाग से भूमि लेने, डीपीआर बनाने और परियोजना के हिस्से में मौजूद निर्माण कार्य व अतिक्रमण चिह्नित किया जाएगा। – अचल जिंदल, योजना निदेशक, एनएचएआई








