किसान आंदोलन पूरे देश में फैलाने की तैयारी, पंजाबी गायक आए साथ, महिलाएं भी कदमताल के लिए तैयार

संयुक्त किसान मोर्चा का चंडीगढ़-मोहाली सीमा पर सात दिवसीय पक्का मोर्चा जारी है। बृहस्पतिवार को प्रदेश के विभिन्न गांवों से किसान और महिलाएं ट्रैक्टर-ट्रॉलियों के साथ मोर्चा स्थल पर पहुंचीं। उन्होंने पानी संकट, कृषि मांगों, गन्ना मूल्य और लैंड पूलिंग नीति को लेकर सरकारों पर हमला बोला।

मोर्चे में पंजाबी गायक भी समर्थन देने आए। बृहस्पतिवार को किसानों ने बैठक कर मोर्चे को आगे बढ़ाने की रणनीति तय की और नारेबाजी भी की। मोर्चे की अध्यक्षता कर रहे मनजीत सिंह धनेर और बलबीर सिंह राजेवाल ने पंजाब में गहराते जल संकट को गंभीर बताया। उन्होंने कहा कि भूजल और नदियों के प्रदूषण से खेती, पशुधन व आम लोगों का स्वास्थ्य प्रभावित हो रहा है। किसान नेता हरिंदर सिंह लख्खोवाल ने कहा, यदि सरकारें बातचीत के लिए आगे नहीं बढ़ीं, तो किसान देशभर में आंदोलन करेंगे।
राजेवाल कहेंगे एक साल यहीं रुको तो डेरा डाल देंगे
रात के करीब तीन बज रहे हैं। हल्की बारिश के बाद मोहाली-चंडीगढ़ सीमा पर ठंडी हवा चल रही है। सड़क किनारे कतार में खड़ी ट्रैक्टर-ट्रॉलियों में अधिकांश किसान नींद ले रहे हैं जबकि कुछ जागकर साथियों और सामान की पहरेदारी कर रहे हैं। कहीं धीमी आवाज में आगे की रणनीति पर चर्चा चल रही है तो कुछ लोग सुबह शुरू होने वाले लंगर की तैयारी में जुटे हैं। पक्के मोर्चे के बीच आधी रात के बाद का यह दृश्य बता रहा है कि किसान केवल सात दिन के प्रदर्शन के लिए नहीं, जरूरत पड़ी तो लंबी लड़ाई के लिए भी तैयारी करके आए हैं।

माछीवाड़ा से आए किसान हरवंत सिंह ने अमर उजाला से कहा कि हम राजेवाल की सुनेंगे। वह कहेंगे कि सात सितंबर को वापस घर चलो तो चले जाएंगे। अगर कहेंगे कि छह महीने या एक साल यहीं रुकना है तो हम यहीं डेरा डाल देंगे। हरवंत सिंह जथेदार राजा बलवीर सिंह के नेतृत्व में 32 ट्रॉलियों के साथ मोर्चे में पहुंचे हैं। उनका कहना है कि जब तक किसान नेतृत्व वापस जाने का फैसला नहीं करता, वे धरनास्थल से नहीं हटेंगे।

एक सितंबर से शुरू हुए मोर्चे में पंजाब के अलग-अलग हिस्सों से किसानों के पहुंचने का सिलसिला लगातार बढ़ रहा है। पहले दिन करीब एक हजार ट्रैक्टर-ट्रॉलियां पहुंचने का दावा किया गया था। दूसरे दिन यह संख्या बढ़कर तीन हजार से अधिक होने की बात किसान संगठनों ने कही। आंदोलन में करीब 32 किसान जत्थेबंदियां शामिल हैं।

और पढ़े  पंजाबी यूनिवर्सिटी का बड़ा फैसला: फीस बढ़ोतरी पूरी तरह ली वापस, 2026-27 में पुराने शुल्क ही रहेंगे लागू
आगामी रणनीति व मांगें 
किसान नेताओं ने शुक्रवार को मोर्चे की अहम बैठक बुलाई है जिसमें अगले संघर्ष का एलान किया जाएगा। उन्होंने पंजाब सरकार से विधानसभा का विशेष सत्र बुलाने की मांग की। किसानों ने पानी के पुराने समझौते और लैंड पूलिंग नीति रद्द करने की भी मांग की है। बासमती, मूंग, मक्का, आलू, मटर और गोभी जैसी फसलों की न्यूनतम समर्थन मूल्य पर खरीद की गारंटी देने की भी मांग की गई है।
  • Related Posts

    पंजाबी यूनिवर्सिटी का बड़ा फैसला: फीस बढ़ोतरी पूरी तरह ली वापस, 2026-27 में पुराने शुल्क ही रहेंगे लागू

    पटियाला की पंजाबी यूनिवर्सिटी ने विद्यार्थियों को बड़ी राहत देते हुए सेशन 2026-27 के लिए हाल ही में की गई फीस बढ़ोतरी को पूरी तरह वापस लेने का फैसला किया…

    नशे से युवक की मौत: दोस्तों ने खेत में दफनाई लाश, 14 दिन बाद पुलिस ने बरामद किया शव

    कपूरथला के एक गांव में नशे के दौरान तबीयत बिगड़ने से एक युवक की मौत हो गई। आरोप है कि उसके साथ मौजूद दोस्त उसे खेतों में छोड़कर चले गए।…