नेपाल में आई प्राकृतिक आपदा और उससे हुए विनाश को एक हफ्ता बीत चुका है। ऐसे में लापता लोगों के परिजनों की आस भी अब टूट रही है। यही वजह है कि कई लोगों ने अपने परिजनों को मृत मानकर उनका प्रतीकात्मक अंतिम संस्कार करना शुरू कर दिया है। इसके लिए लोग अपने प्रियजनों का पुतला बनाकर उसका अंतिम संस्कार कर रहे हैं।
अज्ञात शवों को सामूहिक तौर पर दफनाया जा रहा
नेपाल में मुर्दाघरों के भर जाने के चलते डीएनए नमूना लेकर अज्ञात शवों को दफनाया जा रहा है। हालांकि इसे लेकर हिंदू धर्म को मानने वाले लोगों में नाराजगी है और वे सभी शवों को दफनाने पर आपत्ति जता रहे हैं। यही वजह है कि कई लोगों ने अपने प्रियजनों को मृत मानकर उनके पुतले बनाकर हिंदू धर्म की मान्यताओं के अनुसार पुतलों का अंतिम संस्कार करना शुरू कर दिया है।
सिर्फ 95 शव परिवारों को सौंपे गए
नेपाल में त्रासदी के बाद बरामद शवों में से अब तक केवल 95 शवों की पहचान हो पाई है और उन्हें उनके परिवारों को सौंप दिया गया है। बाकी शवों की पहचान की प्रक्रिया जारी है। बड़ी संख्या में शवों की पहचान नहीं हो पाने के कारण प्रशासन को वैज्ञानिक तरीके अपनाने पड़ रहे हैं। नेपाल के प्रधानमंत्री बलेंद्र शाह ने एक दिन पहले फेसबुक पोस्ट के जरिए बताया था कि बाढ़ में मारे गए लोगों के शवों और अज्ञात शवों को कानून के अनुसार और वैज्ञानिक प्रक्रिया के तहत संभाला जा रहा है।
उन्होंने कहा कि सरकार केवल उन शवों का प्रबंधन कर रही है जिनकी पहचान फिलहाल संभव नहीं है। ऐसे मामलों में डीएनए सैंपल और दूसरे जरूरी सबूत सुरक्षित रखे जा रहे हैं, ताकि आगे चलकर शव की पहचान की जा सके। प्रधानमंत्री के मुताबिक, शवों के प्रबंधन में नेपाली सेना, नेपाल पुलिस और सशस्त्र पुलिस बल की मदद ली जा रही है। जिन शवों की पहचान हो चुकी है, उन्हें उनके परिवारों को सौंपा जा रहा है।






