ट्रंप के डाक मतदान पर संकट: अमेरिकी कोर्ट ने आदेश पर फिर लगाई रोक

Spread the love

क संघीय न्यायाधीश ने गुरुवार को राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के एक कार्यकारी आदेश को लागू करने की कोशिशों पर रोक लगा दी। इस आदेश में डाक मतदाता को सीमित किया गया था।  इस कदम ने उस आदेश को दूसरी बार रोक दिया।

यह सब तब हुआ जब मध्यावधि चुनावों के लिए पहला डाक बैलेट भेजे जाने में बस एक हफ्ता ही बचा था। अमेरिकी जिला अदालत की न्यायाधीश इंदिरा तलवानी ने सरकार को दो हफ्ते तक इस आदेश को लागू करने से रोक दिया।
सुप्रीम कोर्ट में क्यों अपील किया जा सकता है? 
इस मामले को जल्द ही सुप्रीम कोर्ट में अपील के लिए वापस भेजा जा सकता है, क्योंकि कुछ ही दिन पहले न्यायाधीशों ने एक प्रक्रियात्मक निर्णय सुनाते हुए तलवानी के उस पूर्व के फैसले को रद्द कर दिया था जिसने ट्रंप के आदेश को प्रभावी होने से रोक दिया था।
हाई कोर्ट ने पहले फैसला क्यों नही सुनाया? 
गुरुवार को आया यह फैसला डेमोक्रेट्स और मतदान अधिकार समूहों ने हाल ही में सुप्रीम कोर्ट के फैसले का पालन करने के लिए अपने मुकदमों को फिर से दायर किया। उच्च न्यायालय के रूढ़िवादी बहुमत ने ट्रंप के कार्यकारी आदेश की वैधता पर फैसला नहीं सुनाया, बल्कि यह कहा कि इसके खिलाफ कानूनी चुनौतियां हैं। जिनके कारण तलवानी ने शुरू में इसे रोक दिया था। इसे बहुत जल्दबाजी में दायर की गई थीं।

नए औपचारिक नियम में क्या है? 
अब प्रशासन ने एक औपचारिक नियम जारी किया है, जो यह तय करेगा कि क्या अमेरिका डाक सेवा राज्यों के मेल बैलेट पहुंचाएगी या नहीं। इससे कानूनी लड़ाई फिर से शुरू हो गई है।

और पढ़े  नेपाल आपदा- 475 लोगों की मौत, 667 लापता और 1500+ बचाए गए,रसुवा हाइड्रोपावर टनल में सेना का अभियान

इसका असर मध्यावधि चुनावों पर पड़ेगा? 
उतार-चढ़ाव भरी इस कानूनी लड़ाई का मध्यावधि चुनावों पर बड़ा असर पड़ेगा। लगभग एक-तिहाई अमेरिकी डाक से वोट करते हैं। वहीं, चुनाव अधिकारियों का कहना है कि डाक सेवा के नए निर्देशों के मुताबिक अपने सिस्टम में बदलाव करने के लिए उनके पास पर्याप्त समय नहीं है।

डाक सेवा का कहना है कि वह डाक मतपत्रों तब तक डिलीवर नहीं करेगी, जब तक राज्य उन मतदाताओं की सूची नहीं देते, जिन्हें ये बैलेट मिलने चाहिए और लिफाफों को एक खास तरीके से तैयार नहीं करते।

तलवानी ने सुनवाई के दौरान क्या कहा? 
तलवानी ने गुरुवार को लिखा, ‘मुकदमा करने वाले राज्यों के पास मिडटर्म चुनाव से पहले नए मेल बैलेट डिजाइन करने, नए डिजाइनों को मंजूरी दिलाने, मेल बैलेट के उत्पादन का ऑर्डर देने। अपने चुनाव प्रबंधन सिस्टम को अपडेट करने,  यूएसपीएस पोर्टल का इस्तेमाल करने के लिए चुनाव अधिकारियों को ट्रेनिंग देने और पोर्टल पर नागरिकों का डेटा अपलोड करने के लिए न तो समय है और न ही फंड।’ इस मामले की सुनवाई 3 सितंबर को होनी है।

डेमोक्रेट और मतदान अधिकार समूह का क्या कहना है? 
डेमोक्रेट और मतदान अधिकार समूह इस मांग को असंवैधानिक बताते हैं। उनका कहना है कि संविधान राज्यों और कुछ मामलों में कांग्रेस को चुनाव नियम बनाने का अधिकार देता है, न कि राष्ट्रपति या डाक सेवा को।

इसी तर्क के आधार पर अदालतों ने ट्रंप के पहले कार्यकारी आदेश को रोक दिया था, जो पिछले साल जारी किया गया था और जिसमें चुनाव प्रक्रियाओं को बदलने की मांग की गई थी, जैसे कि पंजीकरण के लिए नागरिकता के दस्तावेजी प्रमाण की आवश्यकता।

और पढ़े  कमीशन और बंदरबांट' का पैसा सभी में बराबर बंटेगा,जनता के पैसों पर डाका और फिर ईमानदारी' की कसमें! देखें विडियो
ट्रंप डाक मतदान पर क्या आरोप लगाते हैं? 
राष्ट्रपति लंबे समय से डाक मतदान को निशाना बनाते रहे हैं, जिसके लिए वे झूठा आरोप लगाते हैं कि उन्हें 2020 के चुनाव में हार का सामना करना पड़ा, जबकि उन्होंने स्वयं भी अपना वोट डालने के लिए डाक का इस्तेमाल किया था। ब्रूकिंग्स इंस्टीट्यूशन द्वारा 2025 में प्रकाशित एक रिपोर्ट में पाया गया कि डाक द्वारा डाले गए प्रत्येक 10 मिलियन मतपत्रों में से केवल लगभग चार मामलों में ही धोखाधड़ी हुई थी।

Spread the love
  • Related Posts

    नेपाल बाढ़- सुरंग में फंसे लोगों को बचाने का अभियान हुआ तेज, त्रासदी से बचे 21 भारतीय पहुंचे काठमांडू

    Spread the love

    Spread the loveनेपाल में बाढ़ से आई तबाही का मंजर विचलित कर रहा है। भारत के लोग बड़ी संख्या में लापता हैं। महाराष्ट्र, पश्चिम बंगाल, उत्तर प्रदेश के लापता लोगों…


    Spread the love

    नेपाल आपदा- 475 लोगों की मौत, 667 लापता और 1500+ बचाए गए,रसुवा हाइड्रोपावर टनल में सेना का अभियान

    Spread the love

    Spread the loveनेपाल में बुधवार को आई प्रलयंकारी भोटे कोशी बाढ़ ने पूरे देश में भारी तबाही मचाई है, जिसमें अब तक मरने वालों का आंकड़ा बढ़कर 475 हो चुका…


    Spread the love