इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में उत्तर प्रदेश नगरीय परिसर किरायेदारी विनियमन अधिनियम-2021 की 5 महत्वपूर्ण धाराओं 8, 9, 10, 38 और 42 को असांविधानिक करार देते हुए निरस्त कर दिया। कोर्ट ने कहा, कानून के कई प्रावधान केंद्रीय कानूनों- संपत्ति अंतरण अधिनियम, 1882 और प्रांतीय लघु वाद न्यायालय अधिनियम, 1887 के विपरीत हैं। ऐसे मामलों में राष्ट्रपति की पूर्व सहमति जरूरी थी, जो नहीं ली गई। इसी आधार पर जस्टिस सौमित्र दयाल सिंह और जस्टिस स्वरूपमा चतुर्वेदी की खंडपीठ ने कानून की पांच महत्वपूर्ण धाराओं को रद्द कर दिया। कोर्ट ने इंद्र भूषण साहनी एवं अन्य की याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए फैसला सुनाया।
कोर्ट ने कहा कि 2021 के कानून के प्रमुख प्रावधान रद्द होने के बाद उत्तर प्रदेश शहरी भवन (किराये पर देने, किराया और बेदखली का विनियमन) अधिनियम, 1972 स्वतः प्रभावी हो जाएगा। किराया और बेदखली अधिकारों का निर्धारण पुराने कानून व केंद्रीय कानूनों के तहत होगा।







