केंद्रीय प्रतिनियुक्ति के लिए तुरंत कर रहे रिलीव
सीएम ने कहा कि प्रशासनिक खर्च कम करने के लिए फील्ड अफसरों के लिए उपलब्ध 56 गाड़ियों की संख्या घटाकर 30 की जाएगी। सरकार सभी सरकारी वाहनों को इलेक्ट्रिक वाहनों में बदलने की दिशा में भी काम कर रही है। मुख्यमंत्री ने कहा कि पहले केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर जाने वाले अधिकारियों की फाइलें रोक दी जाती थीं, लेकिन अब ऐसा नहीं किया जा रहा है। प्रतिनियुक्ति के लिए अधिकारियों को तुरंत मंजूरी दी जा रही है। उन्हें रिलीव भी किया जा रहा है। सबसे ज्यादा मंजूरी दिल्ली जाने के लिए दी जा रही है।
आईएएस-आईपीएस का कैडर घटाकर 200 करोड़ बचाने का दावा जनता की आंखों में धूल झोंकने जैसा: राकेश जमवाल
भाजपा प्रदेश मुख्य प्रवक्ता एवं विधायक राकेश जमवाल ने हिमाचल प्रदेश में आईएएस, आईपीएस और आईएफएस अधिकारियों का कैडर घटाने के प्रदेश सरकार के फैसले पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि कांग्रेस सरकार अपनी आर्थिक विफलताओं, वित्तीय कुप्रबंधन और कथित भ्रष्टाचार से जनता का ध्यान भटकाने के लिए छोटे-छोटे फैसलों को बड़ी उपलब्धि के रूप में पेश कर रही है। सरकार का यह रवैया नाखून कटाकर शहीद होने जैसा है। राकेश जमवाल ने कहा कि इससे भी गंभीर विषय यह है कि हिमाचल के अनेक वरिष्ठ अधिकारी केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर जाने को प्राथमिकता दे रहे हैं। सरकार इसे केवल प्रशासनिक प्रक्रिया बताकर अपनी जिम्मेदारी से नहीं बच सकती। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस सरकार की कार्यप्रणाली, राजनीतिक हस्तक्षेप और भ्रष्टाचार को बढ़ावा देने वाली व्यवस्था के कारण प्रशासनिक तंत्र में घुटन का वातावरण बनता जा रहा है। राकेश जमवाल ने कहा कि एक तरफ सरकार 100 या 200 करोड़ रुपये बचाने के दावे कर रही है, दूसरी तरफ पेट्रोल-डीजल पर टैक्स और सेस बढ़ाकर जनता पर लगातार आर्थिक बोझ डाल रही है। बिजली, पानी, राशन, बस किराया, सीमेंट और स्टांप ड्यूटी सहित अनेक मदों में जनता का खर्च बढ़ा है। उन्होंने कहा कि महंगाई और टैक्स के माध्यम से जनता की जेब से पैसा निकालकर फिर 200 करोड़ रुपये की कथित बचत का प्रचार करना आर्थिक सुधार नहीं बल्कि आंकड़ों की बाजीगरी है।








