विभिन्न न्यायाधिकरणों के अध्यक्षों और सदस्यों के चयन के लिए एक आयोग गठित करने वाला विधेयक अगले सप्ताह लोकसभा में पेश किया जाएगा। यह कदम सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद उठाया जा रहा है। प्रस्तावित न्यायाधिकरण सुधार विधेयक का मुख्य उद्देश्य विभिन्न न्यायाधिकरणों में अध्यक्षों और सदस्यों की नियुक्ति तथा उनकी योग्यता में दक्षता बढ़ाना, स्वतंत्रता सुनिश्चित करना, पारदर्शिता लाना और एकरूपता कायम करना है।
प्रस्तावित आयोग का अध्यक्ष बनने के लिए सुप्रीम कोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायाधीश या किसी हाईकोर्ट के सेवानिवृत्त मुख्य न्यायाधीश पात्र होंगे। लोकसभा सदस्यों को वितरित किए गए विधेयक में कहा गया है कि सुप्रीम कोर्ट ने हाल में न्यायाधिकरण सुधार अधिनियम, 2021 के कुछ प्रावधानों को रद्द कर दिया था।
सुप्रीम कोर्ट ने दिया था राष्ट्रीय न्यायाधिकरण आयोग के गठन का निर्देश
सुप्रीम कोर्ट ने एक ऐसे राष्ट्रीय न्यायाधिकरण आयोग के गठन का भी निर्देश दिया था, जो स्वतंत्र हो और जिसमें पेशेवर विशेषज्ञता हो। अदालत ने कहा था कि आयोग को विभिन्न न्यायाधिकरणों के अध्यक्षों और सदस्यों के चयन एवं नियुक्ति के लिए पारदर्शी प्रक्रिया और निगरानी व्यवस्था अपनानी चाहिए।





