बिहार के बांकीपुर विधानसभा सीट पर हुए उपचुनाव के नतीजों ने सियासी दलों को जातीय समीकरण खासतौर पर ब्राह्मण समेत सवर्ण समाज के वोटबैंक को लेकर नए सिरे से रणनीति बनाने पर मजबूर कर दिया है। दरअसल, भरत तिवारी एनकाउंटर के बाद ब्राह्मण समाज में पैदा हुए गुस्से को राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन की पारंपरिक सीट बांकीपुर पर भाजपा की हार का कारण माना जा रहा है। इसका असर बुधवार को लखनऊ में आयोजित जनेश्वर मिश्र जंयती कार्यक्रम में भी नजर आया।
सपा अध्यक्ष ने कहा कि कुशीनगर में कुछ लोगों को मिलने से पहले नहलाया गया। वहीं, उन्होंने गोरखपुर में शिक्षकों के साथ कथित अपमानजनक व्यवहार के जख्म को भी कुरेदा। वह यह बताना भी नहीं भूले कि भाजपा ने पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी बाजपेयी के नाम पर कोई काम नहीं किया। सिर्फ सपा सरकार के बनाए लोकभवन में उनकी प्रतिमा लगाई है।पंडितों पर सांस्कृतिक हमले का उल्लेख करते हुए अखिलेश ने कहा कि इसी सरकार में इस समाज पर विवादित फिल्म भी बनाई गई। इस दौरान उन्होंने विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष का पद माता प्रसाद पांडेय को देने को ब्राह्मण सम्मान से जोड़कर दिखाया।






