घटना की जिम्मेदारी लश्कर-ए-ताइबा (एलईटी) के शैडो संगठन द रेजिस्टेंस फ्रंट (टीआरएफ) ने ली है। सूत्रों के अनुसार मजदूरों को गोली मारने से पहले उनके नाम भी पूछे गए। घाटी में महज 10 दिनों के भीतर टारगेट किलिंग की यह दूसरी बड़ी घटना है। स्थानीय पुलिस के अनुसार दीपक के पिता उमाशंकर रात्रे व भुपेंद्र के दशरथ हैं। दोनों के घर सूचना दे दी गई है। परिजन कश्मीर के लिए रवाना हो गए हैं।
घाटी में फिर खौफ पैदा करने की साजिश
टारगेट किलिंग से आतंकी फिर जम्मू-कश्मीर में खौफ पैदा करने की साजिश रच रहे हैं। इससे पहले भी आतंकी मुख्य रूप से प्रवासी मजदूरों, अल्पसंख्यक समुदाय के लोगों और निहत्थे नागरिकों को निशाना बना चुके हैं। सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार इस तरह के हमलों का मुख्य उद्देश्य घाटी में काम कर रहे बाहरी लोगों में दहशत का माहौल पैदा करना और क्षेत्र की शांति व विकास को बाधित करना है।
तो निशाने पर थी अमरनाथ यात्रा
सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार आतंकियों के निशाने पर अमरनाथ यात्रा थी। लेकिन सुरक्षा के पुख्ता प्रबंध के कारण वह अपनी इस साजिश में सफल नहीं हो सके। इससे पहले भी दक्षिण कश्मीर के अनंतनाग में आतंकियों ने अमरनाथ यात्रा की सुरक्षा में तैनात पुलिस हेड कांस्टेबल आशिक हुसैन कुरैशी की गोली मारकर हत्या कर दी थी। वह मामला भी टारगेट किलिंग का ही था। तब चार हजार संदिग्धों को हिरासत में लिया गया था।
हमले में पाकिस्तानी आतंकी के शामिल होने के संकेत
सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार हमले में असॉल्ट राइफल का प्रयोग हुआ है। इसमें पाकिस्तानी आतंकियों के शामिल होने की आशंका है। पाकिस्तान लगातार पीओके से ध्यान भटकाने के लिए आतंकियों की जम्मू-कश्मीर में घुसपैठ का प्रयास करता रहा है। इसी सप्ताह सुरक्षा बलों ने घुसपैठ के दो बड़े प्रयास असफल किए हैं। शुक्रवार को ही एक पाकिस्तान ड्रोन को मार गिराया।






