सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को दिवंगत पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह के खिलाफ चल रहे कोयला ब्लॉक आवंटन मामले को पूरी तरह बंद कर दिया। शीर्ष अदालत ने उन्हें और अन्य आरोपियों को तलब करने वाले स्पेशल कोर्ट के आदेश को निरस्त कर दिया। इसके साथ ही सीबीआई की उस रिपोर्ट को स्वीकार कर लिया गया, जिसमें डॉ. सिंह को क्लीन चिट दी गई थी।
2005 के तालाबीरा-II ब्लॉक से जुड़ा मामला
यह पूरा मामला 2005 में ओडिशा के तालाबीरा-II कोयला ब्लॉक के आवंटन का है। उस समय डॉक्टर मनमोहन सिंह के पास ही कोयला मंत्रालय का प्रभार था। सीबीआई ने जांच के बाद मामले में कोई आपराधिक साजिश नहीं पाई थी और क्लोजर रिपोर्ट दाखिल की थी।
यह पूरा मामला 2005 में ओडिशा के तालाबीरा-II कोयला ब्लॉक के आवंटन का है। उस समय डॉक्टर मनमोहन सिंह के पास ही कोयला मंत्रालय का प्रभार था। सीबीआई ने जांच के बाद मामले में कोई आपराधिक साजिश नहीं पाई थी और क्लोजर रिपोर्ट दाखिल की थी।
हालांकि, स्पेशल कोर्ट ने सीबीआई की रिपोर्ट को खारिज कर दिया था। स्पेशल कोर्ट ने मार्च 2015 में पूर्व पीएम मनमोहन सिंह, उद्योगपति कुमार मंगलम बिड़ला और पूर्व कोयला सचिव पी.सी. पारख समेत तीन अन्य को आरोपी के रूप में तलब किया था। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने इस आदेश पर रोक लगा दी थी।
पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह का पक्ष
डॉक्टर मनमोहन सिंह ने शुरू से ही अपने फैसले में किसी भी तरह की आपराधिक नीयत से इनकार किया था। उन्होंने कहा था कि आवंटन का निर्णय पूरी तरह प्रशासनिक और तय नीति के तहत लिया गया था। उन्होंने लोक सेवकों पर मुकदमा चलाने के लिए आवश्यक कानूनी अनुमति (संस्वीकृति) के न होने पर भी सवाल उठाया था। अब सुप्रीम कोर्ट के इस अंतिम फैसले से इस पूरे विवाद पर हमेशा के लिए विराम लग गया है।
डॉक्टर मनमोहन सिंह ने शुरू से ही अपने फैसले में किसी भी तरह की आपराधिक नीयत से इनकार किया था। उन्होंने कहा था कि आवंटन का निर्णय पूरी तरह प्रशासनिक और तय नीति के तहत लिया गया था। उन्होंने लोक सेवकों पर मुकदमा चलाने के लिए आवश्यक कानूनी अनुमति (संस्वीकृति) के न होने पर भी सवाल उठाया था। अब सुप्रीम कोर्ट के इस अंतिम फैसले से इस पूरे विवाद पर हमेशा के लिए विराम लग गया है।






