गुरु-शिष्य परंपरा के महापर्व गुरु पूर्णिमा पर धर्मनगरी अयोध्या आज पूरी तरह भक्तिमय वातावरण में सराबोर रहेगी। इस वर्ष का गुरु पूर्णिमा महोत्सव विशेष रूप से इसलिए ऐतिहासिक माना जा रहा है क्योंकि श्री श्री 1008 साकेतवासी महंत रमेश दास महाराज गद्दीनशीन के कृपापात्र शिष्य एवं श्री 108 महंत कल्याण दास जी महाराज के बड़े गुरुभाई श्री श्री 1008 महंत संदीप दास महाराज के उज्जैनिया पट्टी के श्रीमहंत बनने के बाद पहली बार उनके सान्निध्य में श्री मारुति भवन में गुरु पूर्णिमा का भव्य आयोजन किया जा रहा है। इस अवसर पर अयोध्या सहित देश के विभिन्न प्रांतों से संत-महात्माओं, महंतों एवं हजारों गुरु भक्तों के पहुंचने की संभावना है।
गुरु पूर्णिमा महोत्सव को लेकर श्री मारुति भवन को भव्य रूप से सजाया गया है। पूरे मंदिर परिसर को आकर्षक विद्युत सज्जा, रंग-बिरंगे पुष्पों, धार्मिक पताकाओं और स्वागत द्वारों से अलंकृत किया गया है। श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए विशेष दर्शन व्यवस्था, पेयजल, प्रसाद वितरण, बैठने की व्यवस्था तथा सुरक्षा के व्यापक प्रबंध किए गए हैं। आयोजन समिति कई दिनों से तैयारियों में जुटी हुई है ताकि आने वाले प्रत्येक श्रद्धालु को सुगम दर्शन और गुरु कृपा का लाभ मिल सके।
प्रातःकाल वैदिक ब्राह्मणों द्वारा वेद मंत्रों के उच्चारण के साथ भगवान श्रीराम, पवनपुत्र हनुमान एवं गुरु परंपरा का पूजन-अर्चन किया जाएगा। इसके बाद महंत संदीप दास महाराज का पारंपरिक गुरु पूजन, पादुका पूजन, चरण वंदन एवं विशेष आरती संपन्न होगी। श्रद्धालु अपने गुरु के श्रीचरणों में पुष्प अर्पित कर आशीर्वाद प्राप्त करेंगे और जीवन में सुख, शांति तथा आध्यात्मिक उन्नति की कामना करेंगे।
दिनभर श्री मारुति भवन में धार्मिक और आध्यात्मिक कार्यक्रमों की श्रृंखला चलती रहेगी। संतों के प्रवचन, भजन-कीर्तन, गुरु महिमा का गुणगान, धार्मिक संगोष्ठी, प्रसाद वितरण तथा संत सम्मान समारोह जैसे आयोजन श्रद्धालुओं के आकर्षण का केंद्र रहेंगे। बड़ी संख्या में संत, महंत, महामंडलेश्वर और नागा संत भी इस अवसर पर उपस्थित होकर गुरु परंपरा की महिमा का बखान करेंगे।
महंत संदीप दास महाराज ने कहा कि भारतीय संस्कृति में गुरु का स्थान सर्वोच्च है। गुरु ही शिष्य के जीवन से अज्ञान का अंधकार दूर कर ज्ञान, संस्कार और आध्यात्मिक चेतना का प्रकाश फैलाते हैं। गुरु पूर्णिमा केवल एक पर्व नहीं, बल्कि अपने गुरु के प्रति श्रद्धा, समर्पण और कृतज्ञता व्यक्त करने का दिव्य अवसर है। उन्होंने सभी श्रद्धालुओं से गुरु पूर्णिमा महोत्सव में अधिक से अधिक संख्या में उपस्थित होकर गुरुजनों का आशीर्वाद प्राप्त करने और सनातन धर्म की गुरु-शिष्य परंपरा को सशक्त बनाने का आह्वान किया।
उज्जैनिया पट्टी के श्रीमहंत बनने के बाद महंत संदीप दास महाराज की यह पहली गुरु पूर्णिमा अयोध्या के धार्मिक इतिहास में विशेष महत्व रखती है। संत समाज और श्रद्धालुओं में इस आयोजन को लेकर अपार उत्साह है। माना जा रहा है कि श्री मारुति भवन में आज श्रद्धा, भक्ति और आस्था का अभूतपूर्व संगम देखने को मिलेगा, जहां गुरु चरणों में नमन करने के लिए श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ेगा। यह आयोजन सनातन धर्म की गौरवशाली गुरु-शिष्य परंपरा, संत संस्कृति और आध्यात्मिक एकता का प्रेरणादायी संदेश पूरे समाज को देगा।






