सात की सत्ता
वैष्णवी: नीति निर्माण का अनुभव आंदोलन के साथ
दिल्ली की रहने वाली वैष्णवी सीजेपी की प्रमुख प्रवक्ताओं में शामिल हैं। वह पब्लिक पॉलिसी की विशेषज्ञ हैं और केंद्र व राज्य सरकारों के अलावा विभिन्न शोध संस्थानों के साथ करीब पांच साल तक काम कर चुकी हैं। नीति निर्माण और शिक्षा क्षेत्र से जुड़े विषयों पर उनके अनुभव का उपयोग संगठन की रणनीति तैयार करने में किया जा रहा है।
आफरीन : कॉरपोरेट नौकरी छोड़ आंदोलन का रास्ता चुना
बेंगलुरु की रहने वाली आफरीन ने एमबीए करने के बाद निजी क्षेत्र में नौकरी की, लेकिन शिक्षा व्यवस्था और छात्रों की समस्याओं को करीब से समझने के बाद उन्होंने सामाजिक सरोकारों के लिए काम करने का फैसला किया। सीजेपी में वह प्रवक्ता की भूमिका निभा रही हैं और युवाओं व छात्र समुदाय से जुड़े मुद्दों को प्रमुखता से उठाती हैं।
दीपक बालियान: किसान परिवार से छात्र आंदोलन तक
राजस्थान के अलवर जिले के किसान परिवार से आने वाले दीपक बालियान ने राजनीति विज्ञान में परास्नातक किया है। किसानों और युवाओं के मुद्दों पर काम करने के बाद उन्होंने पेपर लीक और शिक्षा व्यवस्था से जुड़ी समस्याओं को देखते हुए सीजेपी का साथ चुना। संगठन में वह प्रवक्ता के रूप में छात्रों और ग्रामीण युवाओं से जुड़े मुद्दों को उठा रहे हैं।
रत्ना: संभाल रहीं सीजेपी के कानूनी मोर्चे की जिम्मेदारी
सीजेपी ने अपने कानूनी मामलों की जिम्मेदारी अधिवक्ता रत्ना सिंह को सौंपी है। रत्ना सिंह का पेशेवर अनुभव पत्रकारिता और वकालत, दोनों क्षेत्रों में रहा है। वह पहले स्क्रॉल और बार एंड बेंच जैसे कानूनी मीडिया संस्थानों में पत्रकार के रूप में कार्य कर चुकी हैं। इसके बाद उन्होंने वकालत के क्षेत्र में कदम रखा और उच्च न्यायालय में प्रैक्टिस शुरू की।
आशुतोष रांका : सामाजिक अभियानों का अनुभव
जयपुर के आशुतोष रांका लंबे समय से सामाजिक आंदोलनों से जुड़े रहे हैं। सीजेपी से जुड़ने से पहले वह परिवर्तन नामक संगठन चलाते थे। इस संस्था के माध्यम से उन्होंने अरावली संरक्षण, डोल का बाड़ जंगल बचाने और नीट परीक्षा जैसे मुद्दों पर अभियान चलाए। संगठन में वह जनआंदोलन और अभियान संचालन का अनुभव साझा कर रहे हैं। उन्होंने आईआईटी कानपुर से बीटेक और लंदन स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स से मास्टर्स किया है। इसके बाद लंदन में मैकिन्से में नौकरी की।
सौरव दास : पत्रकारिता के अनुभव से संभाल रहे संवाद
दिल्ली के रहने वाले सौरव दास सीजेपी के मुख्य प्रवक्ता हैं। उन्होंने पत्रकारिता एवं जनसंचार की पढ़ाई की है और स्वतंत्र खोजी पत्रकार के रूप में काम किया है। संगठन के अनुसार, मीडिया से संवाद स्थापित करने और आंदोलन के मुद्दों को प्रभावी ढंग से सामने रखने की जिम्मेदारी सौरव निभा रहे हैं।
सिद्धांत : पर्दे के पीछे रहकर बने सीजेपी की डिजिटल आवाज
आज के दौर में सोशल मीडिया किसी भी संगठन की पहचान और पहुंच बढ़ाने का प्रभावी माध्यम बन चुका है। इसी कड़ी में छात्र सिद्धांत का योगदान महत्वपूर्ण माना जा रहा है। वह पर्दे के पीछे रहकर सोशल मीडिया के माध्यम से सीजेपी की गतिविधियों को व्यापक स्तर तक पहुंचाने का कार्य कर रहे हैं।
प्रदर्शन समिति दे रही सीजेपी को ताकत
सीजेपी की एक प्रदर्शन समिति है। समिति के सदस्य धरना स्थल की व्यवस्थाओं पर नजर रखते हैं और कार्यकर्ताओं के बीच जिम्मेदारियां बांटते हैं। समिति में राम, अजिंक्य, उज्ज्वल, मोहन, प्रेम प्रकाश, फरहान, रेखा, सुधीर, अक्षय शिंदे, डीके, विवेक, मुकेश, आरिफ समेत कई लोग शामिल हैं। वहीं, सीजेपी की ओर से मीडिया की देखरेख का दारोमदार ऊर्जा और विवेक के पास है। इसके अलावा साउंड सिस्टम आदित्य देख रहे हैं।