शहर की खुली नहरें हादसों को दावत दे रही हैं। सुशीला तिवारी अस्पताल के पीछे की ओर सड़क के गड्ढे से बेकाबू हुआ ई-रिक्शा नहर में जा गिरा जिससे चालक की मौत हो गई। यह सिर्फ एक हादसा नहीं, बल्कि प्रशासन की लापरवाही से हुई मौत है। लगातार हो रहीं दुर्घटनाओं के बावजूद न सड़कों की दशा सुधारी जा रही है और न ही खुली नहरों पर सुरक्षा के इंतजाम किए जा रहे हैं।
गौरतलब है कि शहर में आबादी वाले क्षेत्रों में सिंचाई नहरों पर सुरक्षा संबंधी कोई इंतजाम न किए जाने से अक्सर बच्चों के गिरने का खतरा बना रहता है। पूर्व में कई दोपहिया वाहन चालक नहरों में गिरकर चोटिल हो चुके हैं।
चालक गिरा और सामान सड़क पर बिखरा
प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक सड़क पर गड्ढे के कारण सामान लदा ई-रिक्शा अनियंत्रित हो गया। पहले चालक गिरा और फिर ई-रिक्शा नहर में जा गिरा। वाहन में रखा सामान सड़क पर बिखर गया। ई-रिक्शा चालक माल समेट रहा था कि उसे अचानक चक्कर आया और वह नहर में जा गिरा। उसे तत्काल नहर से निकालकर अस्पताल ले जाया गया।
चेकिंग होती देख बदल लिया रास्ता
हादसे के दौरान वहां मौजूद लोगों ने बताया कि ई-रिक्शा चालक को टीपीनगर से सीधे सिंधी चौराहे की ओर जाना था लेकिन वहां परिवहन विभाग की गाड़ी देख वह सकपका गया और लिंक मार्ग पर वाहन लेकर चला गया। कुछ आगे जाते ही हादसा हो गया।
शहर की नहरों में पहले भी हो चुके कई हादसे
शहर की खुली नहरों में पहले भी कई हादसे हो चुके हैं। 25 जून 2025 को किच्छा के बरा निवासी परिवार सुशीला तिवारी अस्पताल से जच्चा-बच्चा को डिस्चार्ज कराकर हंसी-खुशी कार से घर लौट रहा था। दमकल विभाग के पीछे की ओर बहने वाली नहर में कार गिर गई। यहां भी नहर खुली है। इसमें चार लोगों की मौत हो गई थी और दो लोग घायल हो गए थे। इसके बाद भी यहां न नहर कवर्ड की गई न सुरक्षा के पूरे इंतजाम किए जा सके।
नहर के पास से निकलने वाली सड़कों पर संबंधित विभाग की ओर से ही सुरक्षा के इंतजाम किए जाते हैं, सिंचाई विभाग के पास इसके लिए बजट नहीं होता। – दिनेश रावत, अधिशासी अभियंता सिंचाई विभाग
घटनास्थल के आसपास ठेले लगाने वालों से हादसे की जानकारी ली गई है। शव कब्जे में लेकर मोर्चरी में भिजवा दिया है। -अमित कुमार सैनी, सीओ सिटी








