सोमवार को कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के प्रदर्शनकारी छात्र इन दिनों अडिग संकल्प का प्रतीक बने हुए हैं। सोमवार को हुए कथित पथराव, लाठीचार्ज और आंसू गैस के बाद भी प्रदर्शनकारियों का हौसला नहीं टूटा। अगले दिन वे दुगुनी ऊर्जा के साथ जंतर-मंतर पहुंचे, जहां उन्होंने रातोंरात मंच फिर से खड़ा कर आंदोलन को नई जान दी। वहीं, दिल्ली पुलिस ने सीजेपी के संसद मार्च के दौरान जमकर उपद्रव करने के मामले में अब तक 10 एफआईआर दर्ज की हैं।
जंतर मंतर पर पुलिस एक्शन को चुनौती देने वाली याचिका पर हाईकोर्ट में सुनवाई
दिल्ली हाई कोर्ट आज एक पीआईएल पर सुनवाई करेगा, जिसमें एक्टिविस्ट सोनम वांगचुक की जंतर-मंतर पर भूख हड़ताल के दौरान स्टूडेंट्स और दूसरे प्रोटेस्टर्स पर कथित पुलिस एक्शन को चुनौती दी गई है। इस याचिका में 18 जुलाई के ऑपरेशन की इंडिपेंडेंट जांच, सबूतों को सुरक्षित रखने और शांतिपूर्ण प्रोटेस्ट के संवैधानिक अधिकार की रक्षा के लिए गाइडलाइंस की मांग की गई है।
अगर सरकार नहीं मानी, तो लाखों और लोग दिल्ली आएंगे: आशुतोष रांका
कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के राष्ट्रीय प्रवक्ता आशुतोष रांका कहते हैं, “यह भारत के आजादी के बाद के इतिहास का सबसे बड़ा आंदोलन है। हमने यह बात स्पष्ट रूप से कही है कि 20 तारीख को जो हुआ वह तो बस एक ट्रेलर था। अगर सरकार नहीं मानती, तो लाखों और लोग दिल्ली आएंगे क्योंकि इस बार हम चुप नहीं बैठेंगे। सरकार को वाकई में अपनी जिम्मेदारी समझनी होगी, वरना देश के युवा उन्हें बुरी तरह से सबक सिखाएंगे। एक ऐसी कहानी गढ़ने की कोशिश की जा रही है कि हम शांतिपूर्ण नहीं रहेंगे, लेकिन हम शांतिपूर्ण हैं। 20 तारीख का मार्च भी शांतिपूर्ण था, लेकिन अराजकता केवल उस समय फैली जब पुलिस ने बर्बरता दिखाई और छात्रों की पिटाई की। युवा 31 दिनों से यहां शांतिपूर्वक बैठे हैं क्योंकि हम गांधी और अंबेडकर के सिद्धांतों का पालन करते हैं।”







