राज्य में खुला माध्यमिक विद्यालयों में शिक्षक बनने का मौका, 21252 पदों पर होंगी नियुक्तियां, जानिए…

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प्रदेश के सहायता प्राप्त माध्यमिक विद्यालयों में शिक्षक भर्ती की प्रक्रिया ने रफ्तार पकड़ ली है। माध्यमिक शिक्षा निदेशालय ने सोमवार को राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केंद्र (एनआईसी) के ई-अधियाचन पोर्टल पर कुल 21252 रिक्त पदों का अधियाचन अपलोड कर दिया। इनमें प्रवक्ता (पीजीटी) एवं संलग्न प्राइमरी सहायक अध्यापकों के 3512 पद तथा प्रशिक्षित स्नातक शिक्षक (टीजीटी) के 17740 पद शामिल हैं।

पीजीटी के 2,615 और प्राइमरी सहायक अध्यापकों के 987 पदों का अधियाचन भी पोर्टल पर दर्ज किया गया है। इससे पहले 4,512 सहायता प्राप्त विद्यालयों में प्रधानाध्यापक और प्रधानाचार्य के 2,643 रिक्त पदों का अधियाचन भी अपलोड किया जा चुका है। माध्यमिक शिक्षा निदेशक प्रताप सिंह बघेल ने अधियाचन अपलोड होने की पुष्टि की। उन्होंने बताया कि भर्ती प्रक्रिया की शुरुआत हो गई है।
भर्ती प्रक्रिया की उम्मीद
प्रवक्ता और प्राइमरी अध्यापकों के अधियाचन अपलोड होने से छात्रों में उम्मीद जगी है। अब शिक्षा सेवा चयन आयोग भर्ती की प्रक्रिया शुरू करने में जुट सकता है। सूत्रों के अनुसार, चयन आयोग पहले टीजीटी-पीजीटी और अन्य पदों पर भर्ती शुरू करेगा।

याची शिक्षकों को मिलेगा प्रधानाध्यापक के वेतन का तीन साल का एरियर

परिषदीय विद्यालयों में प्रधानाध्यापक के खाली पद का कार्यभार संभाल रहे ऐसे सहायक अध्यापक जिन्होंने बकाया वेतन देने के लिए कोर्ट में याचिका दाखिल की है उन्हें इसका लाभ दिया जाएगा। याचिका दाखिल करने की तिथि से उन्हें पिछले तीन साल का बकाया वेतन एरियर के रूप में दिया जाएगा। इस संबंध में बेसिक व माध्यमिक शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव पार्थ सारथी सेन शर्मा ने सभी बीएसए को निर्देश दिए हैं।

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उन्होंने कहा है कि अगर किसी बीएसए द्वारा किसी याचिकार्ता शिक्षक को प्रधानाध्यापक के रूप में कार्य करने के लिए अधिकृत किया गया हो। वहीं उस सहायक अध्यापक की ओर से प्रधानाध्यापक का वेतन प्राप्त करने के लिए बीएसए को प्रार्थना पत्र भी दिया गया हो। ऐसी स्थिति में बीएसए तथ्यात्मक रूप से जांच करेंगे कि क्या सहायक अध्यापक के रूप में शिक्षक ने पांच वर्ष का अनुभव पूरा कर लिया है? क्या वह वास्तव में प्रधानाध्यापक के रूप में कार्य कर रहे हैं। यदि ऐसा है तो याचिकाकर्ता को प्रधानाध्यापक के पद का बकाया वेतन याचिका करने की तारीख से अधिकतम तीन साल का ही दिया जाएगा। भले ही वह इससे ज्यादा समय से इस पद पर कार्य कर रहे हों।


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